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'हां, मैं भी बेखौफ आजाद जीना चाहती हूं'

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ये है वॉलीबॉल प्लेयर रितु सैनी, आज से डेढ़ साल पहले रोहतक के प्रेम नगर चौराहे पर बदमाशों ने इसके उपर तेजाब से हमला कर दिया। नम आंखें, लड़खड़ाती जुबान पर रग-रग में मानो गुस्सा-सा भरा है।
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बेहद संयत भाव से कहती है कि मेरी जिंदगी उन्होंने बर्बाद कर दी। उन दरिंदों के लिए सिर्फ जेल काफी नहीं है। मां-बाप पुलिस को पैसा खिला कर उनकी सुख-सुविधा का सारा इंतजाम जेल में करवा देते हैं। मैं चाहती हूं कि उनको तो फांसी की सजा मिले।

लगा था जिंदगी खत्म पर अब नहीं

रितु कहती है कि जिस वक्त घर से बाहर निकलती हूं तो खुद के चेहरे को छिपाना पड़ता है। घर में रहती हूं तो उस पल की याद मुझे जीने नहीं देतीं, लेकिन मैं उन सभी को यह बताना चाहती हूं कि जिंदगी खत्म नहीं हुई है।

तिल-तिल कर मरने से अच्छा है एक बार में मर जाना। यूं भी जिनके सपने मर जाते हैं, उनकी तो दुनिया ही खत्म हो जाती है। पर बहुत हुआ अब नहीं।

अब तो मुझे ठीक होना है और फिर पढ़-लिख कर अपने पैरों पर खड़े होना चाहती हूं ताकि अपने जैसी पीड़िताओं की खातिर कुछ कर सकूं। हां, मेरा चेहरा मुझे नहीं मिलेगा, यह दुख ता-उम्र सालता रहेगा, लेकिन फिर भी मैं हिम्मत नहीं हारूंगी।
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तिल-तिल कर जी रही है रितु

वर्ष 2012 में रितु उपर उसके अपनों ने ही एसिड अटैक किया था। बदले की भावना से किए गए इस हमले में रितु बच तो गई, मगर आज भी तिल-तिल कर जी रही है।

हालांकि उसके सभी आरोपी जेल में हैं लेकिन रितु इससे संतुष्ट नहीं है।

उसे तो इंतजार है बस अपनी सर्जरी पूरी होने का। वह कहती है कि में फिर लड़ूंगी अपने जैसी लड़कियों और महिलाओं की खातिर। रितु की दो बार सर्जरी हो चुकी है। इलाज के लिए पैसा तो मिला लेकिन अन्य खर्च उठाने में परिवार असमर्थ है।
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