एक टूर्नामेंट में टीम इंडिया की हार और शुरू हो गई कप्तान बदलने की किचकिच... क्या सिर्फ कप्तान बदल देने से भारत सीरीज जीतने लगेगा? अगर ऐसा है, तो हर सीरीज में टीम को नया कप्तान मिलना चाहिए!
धोनी अपने निजी प्रदर्शन से सबकी आंख की किरकिरी बने हुए हैं। धोनी ने टी20 विश्व कप के 5 मैचों की 4 पारियों में 65 रन बनाए। कप्तानी के सबसे बड़े दावेदार विराट कोहली ने इस टूर्नामेंट में भारत की तरफ से सबसे ज्यादा रन (5 मैच में 185 रन) बनाए। लेकिन महत्वपूर्ण मैचों (ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 15 व द. अफ्रीका के खिलाफ 2) में वो फ्लॉप रहे।
अगर बड़े मैचों में कोहली इसी तरह फ्लॉप होते रहे, तो कैसे यह मान लिया जाय कि वो कप्तानी के दबाव में और बेहतर कर पाएंगे? यही नहीं, कोहली की भावनाएं मैदान पर हम सबने इस विश्व कप में देख ली है। जब टीम द. अफ्रीका के खिलाफ खेलते हुए सेमीफाइनल के लिए डिस्कवालीफाई हो गई तो कोहली के आंखों से आंसू छलक पड़े। मान लीजिए कोहली अगर इस मैच में कप्तान होते और इस तरह मैदान पर रो पड़ते, तो आप क्या सोचते? क्या आपको यह पसंद होगा कि आपका कप्तान जो आपके देश का प्रतिनिधित्व कर रहा है, मैदान पर रो पड़े?
ऐसा नहीं कि कोहली में वो क्षमता (potential) नहीं है कि वो टीम की कमान संभाल न सकें। इस बात में कोई संदेह नहीं है कि कोहली आने वाले समय में टीम की कप्तानी करेंगे, लेकिन क्या यह समय ठीक है? इस बारे में सोचने की जरूरत है।
कोहली एक बेहतरीन बल्लेबाज हैं। उनको अभी और परिपक्व होना है। ऐसे में उनको अगर अभी कप्तानी दी जाती है तो हो सकता है, उनका प्रदर्शन खराब हो जाए, और वो टीम से बाहर होने की कगार पर आ जाएं।
धोनी के समर्थन में पूर्व खिलाड़ी
- सुनील गावस्कर का कहना है कि आईसीसी को टी-20 विश्व कप के प्रारूप पर गौर करना चाहिए। टीम अच्छा नहीं खेली लेकिन इसके लिए केवल कप्तान दोषी नहीं माना जा सकता।
- पाकिस्तान के पूर्व कप्तान वसीम अकरम का कहना है कि धोनी की कप्तानी पर हायतौबा मचाने की जरूरत नहीं है।
- पूर्व भारतीय कप्तान अंशुमान गायकवाड़ के मुताबिक टीम के प्रदर्शन के लिए कप्तान को क्यों दोष दिया जाए? यदि बल्लेबाज और गेंदबाज बढिया प्रदर्शन नहीं करेंगे तो कप्तान क्या करेगा?