डेविड रुदिशा को भारत आकर यहां से प्यार हो गया है। वह यहां आकर बहुत खुश हैं। लेकिन निकट भविष्य में विश्व कीर्तिमानधारी और ओलंपिक चैंपियन यह एथलीट चाहकर भी भारतीय ट्रैक पर नहीं दौड़ पाएगा। कारण है देश में एथलेटिक्स के डायमंड लीग और ग्रांप्री जैसे आयोजनों का नहीं होना है। रुदिशा का जो कद है वह सिर्फ इन्हीं आयोजनों में उन्हें शामिल होने की इजाजत देता है।
उनके आस्ट्रेलियाई मैनेजर जॉन टेंपलटन खुलासा करते हैं रुदिशा भारत में दौड़ना चाहते हैं लेकिन इसके लिए यहां किसी बड़े एथलेटिक्स के आयोजन का होना जरूरी है। हां, कॉमनवेल्थ गेम्स में वह सत्र की समाप्ति पर थके होने के चलते नहीं आए थे। रुदिशा यहां दिल्ली हॉफ मैराथन के बतौर ब्रांड एंबेसडर के रुप में आए हैं। रुदिशा कीनिया के उस मसाई समुदाय से आते हैं जिसे शेरों से लोहा लेने और अपनी निडरता के लिए जाना जाता है।
वह बताते हैं कि लंदन से जब वह वापस कीनिया आए तो उनके समुदाय ने उनके सम्मान में समारोह किए। वे आज भी उस दिन को याद कर झूम रहे हैं, जिस दिन वह ओलंपिक चैंपियन बने थे। उन्होंने तो यहां तक कह डाला कि वर्ल्ड रिकार्ड बनाकर उन्होंने शेर को मारने जैसा काम किया है।
रुदिशा के पिता ने मैक्सिको सिटी ओलंपिक में रजत जीता था। उनसे प्रेरित होकर उन्होंने एथलेटिक्स शुरू किया। वह फुटबाल और जंपिंग भी करते थे। लेकिन उनके पिता ने कहा कैरियर बनाना है तो एक खेल पकड़ कर महारत हासिल करो। उसके बाद उन्होंने मिडिल डिसटेंस को अपनाया।
कीनिया में एथलीटों के सामने आने का एक बड़ा कारण उनके पास कीप कीनी, बिली कोंचेल्लाह जैसे रोल मॉडलों का होना है। रुदिशा को क्रिकेट का भी शौक है। उनके देश में क्रिकेट सिर्फ नैरोबी में खेला जाता है। अगर यह भारत की तरह पूरे कीनिया में हो तो इसमें भी उनका देश आगे बढ़ सकता है।
रुदिशा ने तो आस्ट्रेलिया के साथ होने वाले टी-20 मुकाबले में भारत की जीत की भविष्यवाणी भी कर दी। स्प्रिंटर उसेन बोल्ट को वह अपना दोस्त मानते हैं। दोनों ने अपनी जीतों के बाद लंदन में एक दूसरे को बधाई दी। एथलेटिक्स के बढ़ावे के लिए उन्होंने बोल्ट के साथ निकट भविष्य में फन मुकाबले की भी संभावना जताई।
हेमंत रस्तोगी