आखिरी ओवर की दो गेंद, और जीत के लिए 12 रन, ऐसे में किसी भी बल्लेबाज पर दवाब लाजिमी होता है और पलड़ा अकसर गेंदबाजी करने वाली टीम का भारी होता है।
लेकिन ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज मिचले मॉर्श ने दबाव से पार पाते हुए नाजुक मौके पर वो कारनामा कर दिया जो क्रिकेट इतिहास में बहुत कम देखने को मिलता है।
165 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए यह मुश्किल स्थिति डॉल्फिंस के खिलाफ पर्थ स्कोचर्स टीम की थी। सामने स्ट्राइक पर थे मिचेल मॉर्श और गेंदबाजी कर रहे थे मीडियम पेसर रोबी फ्रायलिंक।
मिचेल ने रोबी की पांचवीं गेंद पर मिडविकेट के ऊपर से गेंद को स्टेडियम के बीच पहुंचा दिया। अब पर्थ स्कोचर्स को जीत के लिए अंतिम गेंद पर भी छक्के की जरूरत थी।
स्टेडियम में बैठे सभी दर्शकों की सांसे थम चुकी थी।...और आखिर में वो हुआ जो बहुत कम देखने को मिलता है।
मॉर्श ने रोबी फ्रायलिंक की लो फुलटॉस गेंद को साइटस्क्रीन के ऊपर से बाउंड्री के पार पहुंचाकर टीम को चार विकेट से जीत दिला दी।
मिचेल मॉर्श के आखिरी ओवर की आखिरी दो गेंदों पर लगाए गए इन दो छक्कों से पर्थ स्कोचर्स ने डॉल्फिंस को हराकर चैंपियंस लीग ट्वंटी-20 टूर्नामेंट में शानदार आगाज किया।
‘मैन ऑफ द मैच’ बने मॉर्श ने 26 गेंदों में तीन चौकों और दो छक्कों के साथ 40 रन की नाबाद पारी खेली।
सैम व्हाइटमैन ने भी 32 गेंदों में छह चौकों और एक छक्के के साथ 45 रन की धुआंधार पारी खेली। दोनों बल्लेबाजों ने तीसरे विकेट के लिए छह ओवरों में 49 रन की साझेदारी भी निभाई।
इससे पहले डॉल्फिंस ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए सात विकेट पर 164 रन बनाए। खेया जोंडो ने 50 गेंदों में सात चौकों के साथ सर्वाधिक 63 रन की पारी खेली।