टी20 वर्ल्ड कप के पहले ग्रुप मैच में अफगानिस्तान के खिलाफ टीम इंडिया को मिली मुश्किल जीत के बाद विश्लेषक और प्रशंसक हाय-तौबा मचाने में जुटे हैं। कुछ धोनी की कप्तानी में खामियां निकाल रहे हैं तो कोई टीम कम्बिनेशन पर सवाल उठा रहा है। अगर क्रिकेट इतिहास के पन्नों को पलटकर देखें तो पता चलता है कि बड़े टूर्नामेंट के शुरुआती मैच में टीम इंडिया का प्रदर्शन कुछ खास नहीं होता है। लेकिन जैसे-जैसे टूर्नामेंट आगे बढ़ता है टीम का प्रदर्शन निखर जाता है।
2003 क्रिकेट विश्व कप
2003 क्रिकेट विश्व कप में टीम इंडिया ने अपना पहला मैच नीदरलैंड के खिलाफ खेला था। सौरभ गांगुली, सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़, युवराज सिंह, वीरेंद्र सहवाग आदि विश्वस्तरीय खिलाड़ियों से सजी टीम इंडिया पहले मैच में जैसे-तैसे 250 के आंकड़े को पार कर सकी थी। इस मैच में अनिल कुंबले की अच्छी गेंदबाजी के दम पर टीम को मुश्किल से जीत मिली थी। दूसरे मैच में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पूरी टीम इंडिया 125 रनों पर ढेर हो गई और नौ विकेट की करारी मात झेलनी पड़ी। इस हार के बाद प्रशंसकों ने जमकर बवाल काटा था। फिर क्या था सौरभ गांगुली अगुवाई वाली टीम इंडिया पूरे टूर्नामेंट में सभी विरोधी टीमों के जमकर छक्के छुड़ाए और फाइनल तक का सफर तय किया।
2011 का विश्व कप
एशिया महादेश में संपन्न हुए वर्ल्ड कप में टीम इंडिया ने पहले मैच में बांग्लादेश को करारी मात दी। दूसरे मैच में इंग्लैंड के खिलाफ 338 रनों का विशाल लक्ष्य बनाने के बाद भी टीम इंडिया मुकाबले को नहीं जीत सकी और मैच ड्रॉ पर छूटा। इस ड्रॉ के बाद भी विश्लेषक और प्रशंसक टीम के प्रदर्शन पर सवाल उठाने लगे। इसके बाद एमएस धोनी की कप्तानी वाली टीम इंडिया ने ऐसी रफ्तार पकड़ी कि विश्व विजेता का खिताब लेकर ही दम लिया।
2007 टी20 वर्ल्ड कप
पहले टी20 वर्ल्ड कप में भारत की शुरुआत कुछ खास नहीं थी। स्कॉउटलैंड के खिलाफ होने वाला पहला मैच बारिश के चलते रद्द हो गया था। पाकिस्तान के खिलाफ खेला गया दूसरा मैच ड्रॉ हो गया था। पाक के खिलाफ भारत 141 रन बना सकी थी। इस मैच के प्रदर्शन पर सवाल उठने के बाद टीम इंडिया ने तीसरे मैच में न्यूजीलैंड के खिलाफ 190 रन ठोक डाले और शानदार जीत दर्ज की। इस जीत के उत्साह से लबरेज टीम इंडिया का विजय अभियान टी20 फॉर्मेट का विश्व खिताब हासिल करने के बाद थमा।