रॉकी बचपन में ही फौज में भर्ती होकर देश के दुश्मनों को ढेर करने की बातें करता था। पढ़ाई के साथ-साथ वह अपने सपने को पूरा करने में जुटा रहा और ढाई साल पहले ही बीएसएफ में शामिल हो गया। आखिरकार उसने देश के दुश्मनों से लोहा लेते हुए जान न्योछावर कर दी। यह बातें बिलासपुर के रामगढ़ का माजरा के शहीद रॉकी के पिता प्रीतपाल ने कही। उन्होंने कहा कि बेटे रॉकी की शहादत पर परिवार व गांव को गम के साथ ही गर्व भी महसूस हो रहा है।
बता दें कि बुधवार को जम्मू के उधमपुर में बीएसएफ जवानों से भरी बस पर दो आतंकियों ने हमला कर दिया था। इस दौरान जिले के खंड बिलासपुर स्थित रामगढ़ का माजरा से बीएसएफ जवान रॉकी भी वहां मौजूद था। आतंकी हमले में रॉकी ने साहस दिखा उनसे लोहा लिया और अपनी जान की परवाह किए बिना एक आतंकी को मार गिराया। इसी दौरान रॉकी गोली लगने से शहीद हो गया।
बुधवार देर शाम इसकी खबर मिलने पर रॉकी के परिवार समेत समूचे गांव में मातम छा गया। रॉकी की मौत के बाद उसके घर पर पिता प्रीतपाल, बड़े भाई रोहित, मां अंग्रेजो व बहन नेहा का रो-रोकर बुरा हाल है। परिजनों को सांत्वना देने ग्रामीणों समेत वीरवार को दिनभर गांव में प्रशासनिक अमला डटा रहा।
इसमें डीडीपीओ गगनदीप सिंह, तहसीलदार बिलासपुर सुरेश कुमार, खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी नरेंद्र सिंह, एसडीओ पंचायतीराज एसके गोयल, पंचायत अधिकारी सुशील मंगला, पटवारी संजय, एबीपीओ दिलावर सिंह सुबह से ही गांव में परिवार के साथ मौजूद रहे। जबकि राजनीतिक पार्टियों से कोई भी राजनेता नहीं पहुंचा। केवल फोन कर गांव में रॉकी के पार्थिव शरीर के आने की जानकारी लेते रहे।
बोलता था, पहले बहन की शादी कराऊंगा फिर अपनी
पिता प्रीतपाल ने कहा कि उनका परिवार गरीब है और मेहनत मजदूरी करता है। रॉकी का एक बड़ा भाई रोहित व छोटी बहन नेहा है। रॉकी ने 5वीं तक की पढ़ाई गांव के स्कूल से की और उसके बाद तुंबी स्कूल व बिलासपुर से 12वीं की। इसके बाद रॉकी ने बीए में दाखिला लिया, लेकिन इसी दौरान वह फौज में भर्ती हो गया। मौजूदा समय में वह जम्मू के उधमगड़ में तैनात था और छुट्टी पर आने और वापस ड्यूटी पर जाने वाले जवानों को छोड़ने के कार्य पर था।
रॉकी से फोन पर जब बात उसकी शादी की बात करते थे, तो बोलता था कि पहले बहन नेहा की शादी कराऊंगा और उसके बाद अपनी। रॉकी की यह बात याद कर रॉकी की बहन नेहा का रो-रोकर बुरा हाल है। रक्षाबंधन के पास आते ही भाई रॉकी को खो देने पर वह बार-बार कह रही है कि भाई को राखी बांधनी थी। जबकि उसकी पुरानी यादों से मां अंग्रेजो कुछ समय के लिए बेसुध हो गई। मां अंग्रेजो ने कहा कि उसे अपने बेटे की मौत पर दुख के साथ गर्व भी है कि वह भारत माता की रक्षा करते हुए जान की परवाह किए बिना शहीद हो गया। इसी तरह रॉकी के बड़े भाई राहित भी आंसुओं से नम है।
पार्थिव शरीर को गांव आने में लगेंगे 11 घंटे, शुक्रवार को होगा संस्कार
तहसीलदार बिलासपुर सुरेश कुमार व बीडीपीओ नरेंद्र सिंह ने बताया कि वीरवार को दस बजे जम्मू से रॉकी का पार्थिव शरीर गांव के लिए निकला है। जो बीएसएफ के वाहन से लाया जा रहा है और इसे गांव तक पहुंचने में करीब 11 घंटे का समय लग सकता है। ऐसे में संस्कार शुक्रवार को ही किया जाएगा। उन्होंने बताया कि प्रशासन की ओर से परिवार को सांत्वना दी जा रही है। खंड व उपमंडल के सभी अधिकारी व कर्मचारी गांव में मौजूद हैं। श्मशान का रास्ता खराब था, जिसे ठीक करवा दिया गया है।