सर्वे में शामिल प्रतिभागियों ने माना है कि प्रदेश की सड़कों की खराब हालत के कई कारण हैं। हालांकि ज्यादातर शहरों में घटिया स्तर के निर्माण और प्रशासनिक कारणों से सड़क की हालत खस्ता है। 90 फीसदी प्रतिभागियों का कहना है कि सड़कों का निर्माण घटिया स्तर का होता है।
65 फीसदी लोगों का यह भी कहना है कि सड़कों की देखभाल भी ठीक से नहीं होती। सर्वे में लखनऊ की सड़कों की हालत संतोषजनक बताई गई है। मगर लखनऊ के पड़ोसी कानपुर के 99 फीसदी प्रतिभागियों ने निर्माण के घटिया स्तर को सड़कों की खराब हालत की वजह बताया।
बरेली में 98 फीसदी की यही राय थी तो इलाहाबाद और आगरा में क्रमशः 97 फीसदी और 96 फीसदी लोगों ने ऐसा माना।
आगरा के सौ फीसदी प्रतिभागियों का कहना है कि कभी भी सड़क बनाने से पहले ठीक ढंग से प्लानिंग नहीं की जाती। बरेली के 99 फीसदी प्रतिभागियों की भी राय है कि उनके शहर में सड़कें बेतरतीब प्लानिंग का नमूना हैं।
गोरखपुर में 95 फीसदी लोगों ने सड़कों की खस्ता हालत के लिए योजना के अभाव को कारण माना। यदि सर्वे के आंकड़ों पर गौर करें तो गोरखपुर के सौ फीसदी लोग विभिन्न सरकारी एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी को सड़कों की बदहाली के लिए बड़ी वजह मानते हैं।
पांच से दस लाख आबादी वाले छोटे शहरों में शामिल मुरादाबाद के 94 फीसदी लोगों का मानना है कि सड़कों का रखरखाव बहुत ही खराब है, जबकि झांसी के 85 फीसदी लोगों की भी ऐसी ही राय है।