इसके चलते छत्रपाल की पत्रावली अलग कर बाकी के खिलाफ ट्रायल शुरू हो गया। दौरान-ए-सत्र परीक्षण सोनपाल और ब्रजपाल की हत्या हो गई, जबकि वर्ष 1996 में एडीजे-5 की अदालत ने सत्यपाल व मुकेश को बरी कर दिया। मगर छत्रपाल उसके बाद से आज तक फरार ही रहा।
जानकार बताते हैं कि छत्रपाल स्तर से थाना पुलिस स्तर से कोई साठ-गांठ की गई और जिससे उसकी फाइल पर संज्ञान ही नहीं हो सका। कालांतर में लोग यह मानकर बैठ गए कि सभी लोग बरी हो गए। हो सकता है कि छत्रपाल भी बरी कर दिया गया होगा। इसलिए छत्रपाल आराम से गांव में ही रहकर नौकरी करने लगा।
अब आकर छत्रपाल के विरोधियों को इस पुराने घटनाक्रम की कुछ सच्चाई पता लगी तो एडीजे-5 की अदालत में पैरवी करते हुए विनीत पुत्र जगतपाल निवासी बाजौता ने एक याचिका दायर की। जिस पर अदालत ने बताया कि जब निचली अदालत ने मामले में संज्ञान नहीं लिया तो वह ट्रायल कैसे शुरू कर सकते हैं।
इस पर विनीत ने अधिवक्ता चौ.सत्यवीर सिंह की मदद से सीजेएम न्यायालय में याचिका दायर की, जिस पर अदालत ने रिकार्ड से पूरी पत्रावली निकलवाई तो सच्चाई सामने आ गई। अब आकर अदालत ने छत्रपाल की फाइल परसंज्ञान लेकर उसके खिलाफ वारंट जारी किए।
मगर थाना पुलिस स्तर से वारंट पर कोई संज्ञान नहीं लिया गया। इस मामले में सीजेएम न्यायालय ने एसएसपी को पत्राचार किया और खुद विनीत ने भी एसएसपी को शिकायती पत्र दिया। इस मामले में एसपी देहात के निर्देश पर सीओ खैर को लगाया गया।