प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की बदौलत भले ही सड़कों का जाल गांव-गांव तक बिछ गया हो, लेकिन यूपी के 11 महत्वपूर्ण शहरों के लोग अपने शहर की सड़कों की हालत से संतुष्ट नहीं हैं। सर्वे में शामिल 50 प्रतिशत लोग हादसों का बड़ा कारण खराब सड़कों को मानते हैं।
2001 से लेकर 2011 तक देश में सड़क हादसों से करीब 10 लाख लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। सड़क हादसों में उत्तर प्रदेश का रिकॉर्ड सबसे खराब है। प्रदेश में 2003 में 7,845 लोगों की मौत हादसों में हुई। वहीं, 2011 में इसके चलते मरने वाले लोगों की संख्या 21 हजार को पार कर गई।
ताजा सर्वे के मुताबिक संकरी सड़कें, ऊबड़-खाबड़ सतह, सड़कों पर पानी भरा होना, अपर्याप्त ट्रैफिक कंट्रोल मैनेजमेंट, सड़क निर्माण में गुणवत्ता की कमी, खराब प्लानिंग और प्रशासनिक घालमेल इन हादसों को दावत देते हैं। हालांकि बाकी शहरों की अपेक्षा राजधानी लखनऊ के 62 प्रतिशत लोग अपने शहर की सड़कों से संतुष्ट हैं।
इसके ठीक उलट इलाहाबाद के लोगों में अपने शहर की सड़कों को लेकर सबसे ज्यादा नाराजगी है। यहां के महज सात प्रतिशत लोग इसे बेहतर मानते हैं। कानपुर के 73 प्रतिशत, बरेली के 74 प्रतिशत और मुरादाबाद के 72 प्रतिशत लोग सड़कों की दुर्दशा की शिकायत करते हैं। सबसे ज्यादा शिकायत गोरखपुर के लोगों की है।
गोरखपुर के 80 प्रतिशत लोगों का मानना है कि उनके शहर की सड़कें बेहद घटिया हैं। आगरा के 23, मेरठ के 39, वाराणसी के 30 और अलीगढ़ के 22 प्रतिशत लोग अपने शहर की सड़कों के हालात से संतुष्ट नहीं हैं।