रिटायर एडिशनल डायरेक्टर (पी एंड ए)
ओएनजीसी
पर्सनल लाइफ में बेहद एक्टिव एनआर सिंह 'रिटायर ऑफिसर एसोसिएशन' देहरादून के प्रेसीडेंट हैं। इन्हें देहरादून से खास लगाव है। लेकिन राज्य बनने के बाद से राजधानी में हुए बदलावों से वो नाराज हैं।
1952 से देहरादून में रह रहे एनआर सिंह की एजुकेशन डीएवी कॉलेज से हुई है। उनके मुताबिक ओएनजीसी अपने कर्मचारियों की भलाई के लिए हर संभव प्रयास करता है। लेकिन रिटायर हुए ऑफिसर और कर्मचारियों पर ध्यान नहीं दिया जाता है। एनआर सिंह ने बताया कि दिसंबर 2012 के बाद रिटायर हुए कर्मचारी अभी तक अपनी पेंशन के लिए भटक रहे हैं। हां, उन्हें मेडिकल की सुविधा जरूर दी जाती है।
लगातार तेल की कीमतों में इजाफा होने पर उन्होंने बताया कि इसमें सरकार को ही प्रयास करने होंगे। ओएनजीसी कर्मचारियों को तो तेल की कीमतों से ज्यादा कोई फर्क नहीं पड़ता, लेकिन आम आदमी इससे काफी परेशान है। इसलिए सरकार को इन किमतों पर लगाम कसनी होगी।
देश में ज्यादातर तेल बाहर से आता है। जिस कारण तेल की किमतों में बढ़ावा देखने को मिलता है। अगर हमारे देश में ही इसका दूसरा विकल्प ढ़ूढा जाए तो आम आदमी को राहत हो सकती है।
उन्होंने बताया कि अगरतला स्थित ओएनजीसी की फार्म से देश के लोगों को काफी राहत मिलेगी। इसके साथ ही ओएनजीसी देश में तेल की उत्पादकता बढ़ाने के लिए नए प्रोजेक्ट पर भी काम कर रहा है। ये प्रोजेक्ट विदेशों में चल रहे हैं। मुंबई और आसाम में अभी प्रोजेक्ट चल रहे हैं। इसके साथ ही राजस्थान में नए प्रोजेक्ट पर काम किया जा रहा है।
एन आर सिंह ने बताया कि वह देहरादून की शांति, वातावरण और एजुकेशन को ध्यान में रखकर यहां बसे थे, लेकिन अब ये सब खत्म हो चुका है। अब देहरादून बेहद असुरक्षित हो चुका है।