पटियाला हाउस कोर्ट में कन्हैया पर हुए हमले के बाद तिहाड़-प्रशासन उसकी सुरक्षा में किसी तरह की कोताही नहीं बरतना चाहता था। इसी वजह से कन्हैया को बेहद गुपचुप तरीके से तिहाड़ से निकाला गया।
जेल एंबुलेंस से कन्हैया को पहले से तय सागरपुर स्थित काली माता मंदिर के पास जेएनयू के प्रोफेसर और उसके वकील के सुपुर्द किया गया। उसके जेएनयू पहुंचने के बाद तिहाड़ में मौजूद मीडिया को सूचना दी गई कि कन्हैया को रिहा किया जा चुका है।
जेल सूत्रों के मुताबिक कन्हैया की जमानत के लिए कोर्ट की औपचारिकताएं पूरी होने के बाद दस्तावेज लेकर वकील और पुलिस तिहाड़ जेल मुख्यालय पहुंचे। जेल मुख्यालय में तिहाड़ जेल के एडिशनल इंस्पेक्टर जनरल (एआईजी) मुकेश प्रसाद के साथ बैठ कर कन्हैया को सुरक्षित जेल से बाहर निकालने की योजना बनाई गई।
दिल्ली पुलिस से भी तिहाड़-प्रशासन को निर्देश दिए गए थे कि कन्हैया को जेल से मीडिया से बचा कर निकाला जाए। इसके बाद एआईजी के निर्देश पर जेल संख्या तीन के सुपरिंटेंडेंट जोगिंदर सिंह राणा ने कन्हैया को जेल से सुरक्षित बाहर निकालने की योजना तैयार की।
जेल मुख्यालय में ही तय कर लिया गया था कि कन्हैया को उसे लेने आए जेएनयू के प्रोफेसर और वकील को जेल से बाहर सागरपुर स्थित काली माता मंदिर के पास सुपुर्द किया जाएगा। सबसे पहले जेल एंबुलेंस में कन्हैया के सामान को रखा गया और बाहर निकाला गया।
इसके बाद गेट संख्या चार से ही दो और एंबुलेंस जेल से बाहर निकलीं। यह एंबुलेंस कैदियों को इलाज के लिए हरि नगर स्थित दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल ले जाती है। इसके बाद चौथी एंबुलेंस में बैठा कर कन्हैया को बाहर निकाला गया।
जेएनयू के प्रोफेसर और कन्हैया के वकील काली माता मंदिर के पास गाड़ी लेकर पहले से मौजूद थे। कन्हैया को जेल से शाम करीब साढ़े छह बजे निकाला गया। वहां से उसे सीधे जेएनयू ले जाया गया।