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आईएएस बनने को जरूरी नहीं कि कोचिंग ली ही जाए: संदीप

Tue, 09 Dec 2014 01:40 PM IST
भूपेंद्र राणा/अमर उजाला, मंडी
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आईपीएस और आईएएस बनने के लिए यह जरूरी नहीं कि कोचिंग ही ली जाए। युवा जिस विषय की पढ़ाई कर रहे हैं, उस पर फोकस रखें। साथ ही बेसिक विश्लेषण की क्षमता को भी बढ़ाएं। यह कहना है मंडी के उपायुक्त संदीप कदम का। उनका कहना है कि यदि मन में कुछ करने का जज्बा हो तो हर राह आसान हो जाती है।
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कड़ी मेहनत ही सफलता की कुंजी है। जनसेवा के जज्बे के चलते वह भी आईपीएस की नौकरी छोड़कर प्रशासनिक अधिकारी बने हैं। उन्होंने एक ही प्रयास में आईएएस और आईपीएस में सफलता पाई। मूल रूप से महाराष्ट्र के रहने वाले संदीप कदम आईआईटी की शिक्षा ग्रहण करने के बाद आईपीएस की तैयारी में जुट गए।

वर्ष 2005 में आईपीएस अधिकारी बने। तीन साल तक झारखंड के पूर्वी सिंहभूमि और पलांऊ में बतौर एएसपी के पद पर सेवाएं दीं। साथ ही आईएएस अधिकारी बनने के लिए मेहनत जारी रखी। वर्ष 2008 में आईएएस बने। अपने मकसद में कामयाबी मिलने पर उन्होंने आईपीएस की नौकरी छोड़ दी।
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प्रॉबेशनरी आईएएस अधिकारी के रूप में संदीप कदम ने बिलासपुर जिले के झंडूता में बीडीओ के पद पर सेवाएं दीं। इसके बाद एसडीएम बिलासपुर का पदभार संभाला। मंडी में अतिरिक्त उपायुक्त रहने के बाद चंबा के उपायुक्त बने। वर्तमान में मंडी के जिला उपायुक्त हैं।

समाज हित में बेहतर करने की चाह
उपायुक्त संदीप कदम ने कहा कि आईपीएस की नौकरी छोड़ने का यही मकसद था कि प्रशासनिक सेवा में आकर देश और समाज हित में कुछ बेहतर कार्य किया जाए। वह वर्ष 2005 से 2007 तक झारखंड राज्य में एएसपी के पद पर तैनात रहे। वर्ष 2008 में आईएएस अधिकारी बने।
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