आपदा के तुरंत बाद रुद्रप्रयाग के डीएम बनाए गए पंकज पांडेय की तैनाती और अब हटाए जाने को लेकर तमाम सवाल उठ रहे हैं।
चुनौतीपूर्ण और महत्वपूर्ण कार्यकाल
लेकिन अपने छोटे से कार्यकाल को जिलाधिकारी बेहत चुनौतीपूर्ण और महत्वपूर्ण मानते हैं। उनका कहना है कि उन्हें रुद्रप्रयाग उजाड़ हाल में मिला था उसकी नई तस्वीर बन कर उभरने में समय लगेगा लेकिन इसकेलिए उन्होंने एक कैनवास तैयार करने का काम किया।
अमर उजाला स्टेट ब्यूरो चीफ अनूप वाजपेयी ने उनसे तमाम ऐसे सवाल पूछे जिन्हें लेकर वह करीब पांच महीने तक उलझे रहे। आपदा के करीब बीस दिन बाद उन्हें रुद्रप्रयाग भेजा गया था।
प्र. आपका दावा था जिले में प्रभावितों को शत प्रतिशत राहत राशि या मुआवजा वितरित कर दिया है लेकिन अभी भी लोग भटक रहे हैं?
उ. ऐसा नहीं है, पिछले साल की आपदा से प्रभावितों लोगों ने भी दावा कर दिया है। जिससे कागजी प्रक्रिया उलझ गई। उसी में कुछ दिक्कतें आई हैं।
प्र. इस दौरान जिले में जमकर आंदोलन हुए। आप अपने आश्वासन भी पूरे नहीं करा सके। जिला मुख्यालय से सटे जोशियाड़ा में एक पैदल पुल भी नहीं बना?
उ. जोशियाड़ा का डीपीआर हो चुका है। एनबीसीसी को टेंडर हुआ है। काम जल्द शुरू हो जाएगा। बावजूद एक रास्ता चालू हो
चुका है। मलबा निकालने केटेंडर भी निकाले जा चुके हैं। बाढ़ सुरक्षा को लेकर भी टेंडर निकल चुके हैं। जल्द ही काम शुरू हो जाएगा। तिलोत का पुल की भी स्वीकृति हो चुकी है। पैदल का रास्ता चालू है।
प्र. ट्रालियां जुगाड़ से चल रही हैं। लगातार खतरा मंडरा रहा है?
उ. झूलापुल के बह जाने पर वैकल्पिक रूप से ट्राली लगाई गई हैं। पुलस बनने में डेढ़ से दो साल लगेंगे। बावजूद इसकी प्रक्रिया चल रही है।
प्र. मुख्यमंत्री ने 26 अक्तूबर को उत्तरकाशी में 211 करोड़ के कायों का शिलान्यास किया था। इनमें 160 करोड़ के बाढ़ सुरक्षा कार्य शामिल थे लेकिन इनमें से एक भी कार्य पूरा नहीं हो सका है?
उ. आपदा के चलते जो भी निर्माण कार्य होने हैं उनमें समय लगेगा। मैं सभी कागजी खानापूर्ति पूरी कर दी है। ऐसी योजनाएं हैं जिनमें कुछ समय जरूर लगेगा।
प्र. स्थानीय लोग आपके कामकाज की तुलना पूर्व जिलाधिकारी राजेश कुमार से कर उन्हें बेहतर बताते हैं। साकेत बहुगुणा को टिहरी सीट से मैदान में उतारने की तैयारी है, ऐसे में आपके तबादले के राजनीतिक मतलब निकाले जा रहे हैं?
उ. राजेश कुमार सच में बेहरत काम कर गए लेकिन उन्हें एक साल का समय मिला और हालात ऐसे नहीं थे। मेरे आने के बाद तीन महीने बारिश होती रही।
बावजूद मैंने आपदा के बाद योजनाओं की जमीन तैयार कर दी है जो कुछ समय बाद दिखाई देंगी। मेरा तबादला पूरी तरह से प्रशासनिक है। मुझे प्रदेश के बड़े और महत्वपूर्ण जिले ऊधमसिंह नगर की जिम्मेदारी दी गई है। जिसे मैं बखूबी निभाऊंगा।