जावेद अली, प्लेबैक सिंगर
इन दिनों फिल्मी गीतों में फूहड़ता का बोलबाला है, लेकिन ऐसे गीतों की कोई उम्र नहीं होती। राजधानी देहरादून स्थित दून ग्रुप ऑफ कॉलेज में परफॉर्म करने आए बॉलीवुड गायक जावेद अली ने अमर उजाला से बातचीत में अपने विचार साझा किए।
हमेशा से लुभाता है दून
जावेद अली ने बताया कि दून उन्हें हमेशा से ही लुभाता है। बताया कि टीवी शो सारेगामापा में जज बनना सौभाग्यशाली था। इस शो के लिए उन्होंने पर्सनैलिटी डेवलपमेंट कोर्स भी किया। जावेद का कहना है कि जज बनने से पहले वह काफी शर्मिले थे, लेकिन जज बनने से उन्हें काफी हौसला मिला।
उनका कहना है कि सूफी गीत सहाबहार होते हैं लेकिन फूहड़ गीतों की उम्र बेहद कम होती है। एआर रहमान के साथ जोधा अकबर में गीत गाने को वह सौभाग्य मानते हैं। जावेद अली ने रणबीर कपूर के लिए दोबारा गीत गाने की तमन्ना जाहिर की। इससे पहले वह अजब प्रेम की गजब कहानी में उनके लिए गीत गा चुके हैं।
उन्होंने बताया कि जोधा अकबर में ऋतिक रोशन के साथ भी उनकी आवाज काफी मैच हुई है। जावेद कजरारे-कजरारे गीत को अपनी कॅरियर का टर्निंग प्वाइंट मानते हैं। उन्होंने कहा कि वह केबीसी की टैग लाइन ‘सीखना बंद तो जीतना बंद’ को अपनी जिंदगी का फलसफा मानते हैं।
गुलाम अली हैं आदर्श
जावेद अली का कहना है कि उनके पिता भी संगीत से ताल्लुक रखते थे, इसलिए बचपन से ही उन्हें भी यह शौक रहा है। वह प्रसिद्ध गजल गायक गुलाम अली को अपना गुरु मानते हैं। गुलाम अली को सम्मान देते हुए ही उन्होंने अपना नाम जावेद हुसैन से बदलकर जावेद अली कर लिया है।