आरोप लगाया कि जिला प्रशासन की लापरवाही से उनको एक साल का मानदेय नहीं मिल रहा है। परियोजना निदेशक के खाते में मानदेय का पैसा डंप होने का आरोप लगाया।
राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा।
अनुदेशकों के अनुसार जिले में तीन साल तक संचालित 35 विशेष बाल श्रम विद्यालयों में 175 अनुुदेशक, लिपिक चयनित थे। मई 2014 में योजना के समाप्त होने से विद्यालय बंद हो गए लेकिन एक साल का मानदेय आज तक उन्हें नहीं मिल सका। प्रशासन की ओर से एक साल से सिर्फ आश्वासन दिया जा रहा है।
आरोप लगाया कि शासन से धन आने के बाद परियोजना निदेशक के खाते में डंप पड़ा है लेकिन उन्हें नहीं दिया जा रहा है। परियोजना की समाप्ति के बाद कर्मचारियों को श्रम विभाग में समायोजित करने के लिए श्रम मंत्रालय भारत सरकार की ओर से पत्र आ चुका है लेकिन उस पर कोई फैसला प्रशासनिक स्तर से नहीं लिया जा रहा है।
चेतावनी दी कि अविलंब उन्हें मानदेय नहीं मिला तो वह सड़क पर उतरने के लिए बाध्य होंगे। प्रदर्शन करने वालों में अश्वनी, वासुदेव प्रजापति, जितऊलाल पाल, संजय दूबे, चंदा देवी, संजय कुमार तिवारी, संतोष कुमार सरोज, बीएल सरोज, रामबली, उर्मिला पटेल, नसरीन फातिमा, माधुरी देवी, रीता पांडेय, लालमणि, रवींद्र कुमार पांडेय, शिव नारायण सहित कई लोग मौजूद रहे।