मनरेगा कर्मचारी कामकाज छोड़कर धरने पर बैठ गए हैं। आठ माह से मानदेय का भुगतान न मिलने से परेशान कर्मचारियों का कहना है कि सरकार की नीतियों से उनके सामने घोर संकट खड़ा हो गया है। जिले में मनरेगा में कार्यरत 50 कर्मचारी भविष्य को लेकर चिंतित हैं।
डीएम कार्यालय के सामने धरने पर बैठे कर्मचारियों ने जोरदार प्रदर्शन किया। मनरेगा कर्मचारी संगठन के अध्यक्ष योगेश चंद ने कहा कि जिला प्रशासन को इसमें पहल करनी चाहिए। यदि जिला प्रशासन केंद्र सरकार के सामने ठोस तरीके से मुद्दे को रखे तो जरूर कुछ समाधान निकल सकता है। उन्होंने कहा कि जब यह योजना शुरू की गई थी, तब कहा गया था कि गांवों के विकास का नया युग शुरू हो रहा है। केंद्र में सत्ता परिवर्तन होते ही सबसे पहली मार मनरेगा योजना पर ही पड़ी है।
चंद ने कहा कि केंद्र सरकार को इस मामले में किसी प्रकार की राजनीतिक दुर्भावना नहीं रखनी चाहिए। उसे तत्काल देश हित में योजना के लिए धन जारी करना चाहिए। कर्मचारियों ने पूरा मानदेय मिलने तक आंदोलन करने का संकल्प लिया। प्रदर्शन में रोशन कुमार, गोविंद सिंह, दिनेश जोशी, कल्याण चंद, दीपक रावल, महादेव प्रसाद, मनोज थापा, तेज सिंह कुंवर, हिमांशु उपाध्याय, संतोष बुदियाल, मनोज जोशी, महेश बसेड़ा आदि थे।