जिंदगी में कुछ अलग करने का जज्बा और जनसेवा के जुनून ने ही मुनीष शर्मा की राह से बाधाओं को दूर कर दिया। स्कूल लेक्चरर का पद छोड़कर एचएएस परीक्षा पास कर बीडीओ बने मुनीश का अंदाज ही निराला है। समय पर कार्य निपटाना उन्हें पसंद है। वह पिछले एक साल से खंड कार्यालय देहरा में बतौर बीडीओ तैनात हैं।
उनकी पहली ज्वाइनिंग जनजातीय क्षेत्र भरमौर में हुई। वहां तीन साल कार्य करने के बाद देहरा में तबादला हो गया। भोटा (हमीरपुर) के निकट छोटे से गांव झांडी के मुनीष शर्मा की पढ़ाई सरकारी स्कूल में हुई। दस साल सरकारी स्कूल में बतौर लेक्चरर सेवाएं दीं। वह प्रदेश विवि से एमएससी भौतिकी में गोल्ड मेडलिस्ट हैं।
बीडीओ मुनीष शर्मा कहते हैं कि उन्होंने एचएएस के लिए कोचिंग नहीं ली थी। पहले प्रयास में एचएएस परीक्षा पास की। लेक्चर रहते एचएएस परीक्षा पास करना आसान नहीं था। इसके लिए उन्होंने तीन घंटे सुबह और तीन घंटे रात को पढ़ाई कर यह मुकाम पाया। इसके लिए उन्होंने किसी की सहायता नहीं ली। स्वयं पर भरोसा रखकर सेल्फ स्टडी सहित स्कूल लाइब्रेरी की किताबों से तैयारी की।
उत्कृष्ट कार्य के लिए मिले अवार्ड
बीडीओ देहरा के पद पर तैनात मुनीष कुमार को सरकारी सेवा में उत्कृष्ट कार्य के लिए अवार्ड भी मिले हैं। उन्हें एअर इंडिया की ओर से रैंक एंड बोल्ट अवार्ड शिमला और हिमाचलश्री अवार्ड भरमौर में बीडीओ पद पर रहते जनजातीय क्षेत्र में बेहतर कार्य करने पर मिला है।
अपने संस्कारों को न भूले युवा वर्ग
सिर्फ मेहनत को ही मूलमंत्र और कर्म को पूजा मानने वाले वाले बीडीओ मुनीष शर्मा ने युवाओं को नसीहत दी है कि वे अपने संस्कारों को न भूलें। कहा कि अपने माता-पिता और अध्यापकों के आशीर्वाद से युवा पीढ़ी कठिन से कठिन लक्ष्य को भी हासिल कर सकती है।