कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय कांट की टीचर नेहा पाल के आत्महत्या के बहुचर्चित मामले में एक आरोपी हरेंद्र सिंह ने सीजेएम कोर्ट में सोमवार को सरेंडर कर दिया। उसके सरेंडर करने की वजह पुलिस द्वारा की जा रही उसकी संपत्ति की कुर्की करने की तैयारी को माना जा रहा है। वहीं, दूसरी आरोपी शिखा भारती अब भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है।
सोमवार को खचाखच भरी अदालत में साढे़ 12 बजे के बाद हरेंद्र सीजेएम कोर्ट में सरेंडर करने के लिए पहुंच गया। इससे पहले पुलिस को भी इसकी भनक नहीं लग सकी। सरेंडर करने के 15 मिनट के बाद पुलिस ने उसे लॉकअप में भेज दिया, जिससे कोई वाद-विवाद न हो।
कांट के पड़ैंचा स्थित कस्तूरबा विद्यालय की टीचर नेहा पाल के 23 जुलाई को हुई आत्महत्या के मामले में नेहा ने एक सुसाइड नोट लिखा था, जिसमें नेहा ने अपनी मौत का जिम्मेदार शिखा और हरेंद्र को बताया था। नेहा पाल के पिता ने अदालत से दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की थी। इस पर अदालत ने करीब 18 दिन पहले दोनों के खिलाफ गैरजमानती वारंट जारी किया था। बावजूद इसके पुलिस न तो उन लोगों को पकड़ सकी और न ही दोनों में से किसी ने कोर्ट में सरेंडर किया।
केस के विवेचक सीओ सिटी राजेश्वर सिंह ने गिरफ्तारी का दबाव बनाने के लिए शिखा भारती और हरेंद्र सिंह की संपत्ति को कुर्क करने को प्रार्थना-पत्र दिया था, जिस पर सीजेएम ने गैर जमानती वारंट जारी किया था। बाद में अदालत से उन दोनों के फरार होने की घोषणा कर दी थी। इसके बाद दोनों की संपत्ति की कुर्की की जा सकती थी। इसी दबाव के चलते सोमवार को हरेंद्र सिंह ने अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया।