कानपुर में नोट बंदी के बाद आ रही नकारात्मक खबरों के बीच कुछ सकारात्मक पहल भी शुरू हो गई हैं। ग्रामीण इलाकों के लोग भी ई-वॉलेट का रुख कर रहे हैं। बिल्हौर तहसील के चौबेपुर ब्लाक के पचोर गांव को ही ले लीजिए। मेडिकल स्टोर, जनरल स्टोर, खाद-बीज की दुकानों में पेटीएम से भुगतान लिया और दिया जा रहा है।
536 परिवार वाले इस गांव की आबादी करीब चार हजार है। गांव में मोबाइल, इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले युवा खूब हैं। युवा ग्राम प्रधान पीयूष मिश्रा ने बताया कि नोट बंदी के बाद से व्यापार में परेशानी आ रही थी। चौराहे पर बनी दुकानों को कैश लेस लेनदेन से जोड़ने के लिए उन्होंने बुधवार को ई-वॉलेट कंपनी पेटीएम के लोगों को गांव में बुलाया। प्ले स्टोर के माध्यम से गांव के कई व्यापारियों और युवाओं के मोबाइल पर पेटीएम एप डाउन लोड करवाई गई। अब व्यापार करने के साथ ही रोजमर्रा की खरीदारी भी कुछ आसान हुई है।
मेडिकल स्टोर से ली दवा
चौराहे पर स्थित शुक्ला मेडिकल स्टोर के नितिन शुक्ला को ट्रांजेक्शन की प्रक्रिया समझाने के लिए ग्राम प्रधान ने 20 रुपये की पैरासीटामाल की स्ट्रिप खरीदी और भुगतान पेटीएम के माध्यम से किया। इसके बाद नितिन ने उन्हीं 20 रुपये से रितेश तिवारी के जनरल स्टोर से अपना मोबाइल रिचार्ज कराया। इसके साथ ही ये लोग कैश लेस भुगतान की प्रक्रिया भी समझ गए।
पेटीएम करो, खाद-बीज खरीदो
पचोर गांव के लोग चौबेपुर कस्बे की सैनिक ट्रेडर्स से खाद-बीज खरीदते हैं। बुआई के समय नोट बंदी से परेशान किसानों को उधार पर बुआई का सामान दे रहे थे। उधारी की यह व्यवस्था बहुत दिन तक नहीं चल सकती थी। इसलिए सोनू ने ई-वॉलेट से जुड़ने ठीक समझा। ग्राम प्रधान पेटीएम कंपनी के लोगों के साथ दुकान पर पहुंचे और जरूरी दस्तावेज ले ई-वॉलेट से जोड़ा। गांव के किसानों को भी जोड़ा गया।
पेटीएम वॉलेट से मुफ्त में खाते में डालें पैसा
पेटीएम से जुड़े दुकानदारों का सबसे बड़ा सवाल था कि वह ग्राहक के पेटीएम से अपने पेटीएम पर रकम तो ले लेंगे लेकिन इस पर आने वाले रुपये का क्या करेंगे। उस रकम को अपने बैंक खाते में ट्रांसफर करना हो तो कोई शुल्क देना होगा या नहीं। कंपनी के अधिकारियों ने बताया पेटीएम वॉलेट से बैंक खाते में रकम ट्रांसफर करने पर कोई शुल्क नहीं देना है।