दारमा घाटी के लोगों ने आज जिला मुख्यालय आकर डीएम कार्यालय के सामने प्रदर्शन किया और दारमा घाटी के 14 गांवों को जोड़ने के लिए कंच्योती और सोबला में पक्का पुल बनाने की मांग की। यह दोनों पुल 2013 की आपदा में बह गए थे। इसके अलावा यारसा गंबू के दोहन और बिक्री पर लगा प्रतिबंध हटाने की मांग भी उठाई।
भूमि अधिकार मंच के बैनर तले जिला मुख्यालय पहुंचे लोगों ने कहा कि कंच्योति और सोबला का पुल बनाने के मामले को लटकाया जा रहा है। पिछले दिनों कंच्योति में अस्थायी पुल का निर्माण तो किया गया लेकिन इससे कोई राहत नहीं मिल रही है। दारमा घाटी के गांवों को राशन पहुंचाने में भारी परेशानी हो रही है। लोगों की मांग है कि दारमा घाटी में मोबाइल टावर लगाया जाए, हर गांव में आधार कार्ड बनाने के लिए शिविर लगाया जाए, अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों को जमीन का हक दिया जाए, सफाई के लिए गांवों को दी जाने वाली धनराशि ग्राम प्रधानों के खाते में डाली जाए।
भूमि अधिकार मंच के सलाहकार महेंद्र मार्छाल ने कहा कि अभी तो सिर्फ सांकेतिक रूप से आंदोलन किया गया है। यदि प्रशासन ने तत्काल कदम नहीं उठाया तो व्यापक स्तर पर आंदोलन छेड़ दिया जाएगा। प्रदर्शन में दीवानी राम, ममता सेलाल, सुरेंद्र सीपाल, आशा देवी, सरिता ग्वाल, भागीरथी देवी, खीमा देवी, किरन ग्वाल समेत तमाम लोग थे।