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आर्ट ऑफ लिविंग के सांस्कृतिक कार्यक्रम : डीडीए की मंजूरी पर उठे कई सवाल

Fri, 04 Mar 2016 10:02 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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Art of Living Program in delhi - फोटो : Amar Ujala
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आर्ट ऑफ लिविंग के वृहत वैश्विक सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजन की मंजूरी वैध है या अवैध। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में इसी पहलू पर सफाई देते हुए दिल्ली विकास प्राधिकरण ने कई बार अपने ही तथ्यों और बयानों का खंडन किया।
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वहीं सुनवाई के दौरान बेंच ने आयोजन की मंजूरी से जुड़े कई सवाल डीडीए से पूछे। बेंच ने डीडीए से पूछा कि आपने इतने विशाल आयोजन का अवलोकन किए बिना ही मंजूरी क्यों दे दी। इस पर डीडीए ने कहा कि उन्हें कार्यक्रम की विशालता का आभास नहीं था।

बेंच ने इस जवाब पर प्राधिकरण को फटकार भी लगाई। वहीं एक दूसरे सवाल पर भी डीडीए की ओर से जुदा तथ्य सामने आया। बेंच ने पूछा कि आपने पश्चिमी यमुना डूब क्षेत्र में पार्किंग के लिए 3.3 हेक्टेयर, बैठक के लिए 20 हेक्टेयर व एक हेक्टेयर जमीन स्टेज के लिए दिया है।
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इस पर डीडीए ने कहा कि उन्होंने पार्किंग के लिए कोई जगह नहीं दी है। सिर्फ कार्यक्रम के लिए जगह दी गई है। वहीं सुनवाई के दौरान यह भी तथ्य सामने आया कि डीडीए के मंजूरी पत्र में आवंटित जगह का दायरा भी स्पष्ट नहीं है।

जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली बेंच ने बृहस्पतिवार को याची मनोज मिश्रा, पर्यावरणविद आनंद आर्या और एडवोकेट प्रदीप कुमार त्यागी की याचिका पर लगातार तीसरे दिन सुनवाई की।

बेंच मामले की अगली सुनवाई  7 या 8 मार्च को कर सकता है। वहीं सुनवाई के दौरान याची मनोज मिश्रा ने कहा कि यमुना किनारे मलबा डंप किए जाने का वीडियो साक्ष्य भी उनके पास मौजूद है।

पूरे मामले में डीडीए खुद का बचाव करता हुआ दिखा। सुनवाई के दौरान डीडीए की ओर से पेश एडवोकेट राज कुमार बंसल ने कहा कि उन्होंने मास्टर प्लान 2021 के तहत जिस इलाके में मंजूरी दी है वह जोन-ओ में आता है।

यह मंजूरी रीक्रिएशन के लिए दी गई थी। यह यमुना डूब क्षेत्र का प्रतिबंधित नहीं अधिकृत क्षेत्र है। हमने सिर्फ मंजूरी दी है। इस मामले में करीब 21 संस्थाओं के जरिये मंजूरी दी जानी है। कुछ मंजूरी अब भी बाकी होंगी। अकेले डीडीए ने यह मंजूरी नहीं दी।

​सिर्फ 15 लाख की सिक्योरिटी पर कार्यक्रम को मंजूरी

Art of Living Program in delhi - फोटो : Amar Ujala
यह स्वीकार किया जा सकता है कि कार्यक्रम के लिए यमुना डूब क्षेत्र का नुकसान किया गया है। न सिर्फ यमुना डूब क्षेत्र का बल्कि बीच यमुना में भी पैंटून पुल बनाया गया है। डीडीए ने सुनवाई के दौरान बताया कि उसने मंजूरी के साथ कई शर्तें भी आर्ट ऑफ लिविंग के लिए जोड़ी थीं।

डीडीए ने बीते वर्ष 15 दिसंबर को भेजे गए एक पत्र का जिक्र करते हुए कहा कि इस पत्र में स्पष्ट लिखा गया था कि कार्यक्रम स्थल पर सिर्फ ईको-फ्रेंडली निर्माण सामग्री का इस्तेमाल करना होगा।

साथ ही कार्यक्रम के लिए यमुना डूब क्षेत्र से सुरक्षित दूरी बनाने को भी कहा गया था। बेंच ने सुनवाई के दौरान डीडीए के वकील से पूछा कि सुरक्षित दूरी का क्या मतलब है। लेकिन डीडीए इस सवाल का जवाब नहीं दे सका।

बेंच ने सुनवाई के बाद उत्तर प्रदेश व दिल्ली सरकार से भी इस मामले पर अपना पक्ष ट्रिब्यूनल में पेश करने को कहा है। कार्यक्रम स्थल का दायरा दिल्ली और उत्तर प्रदेश दोनों सीमाओं के यमुना किनारे डूब क्षेत्र में मौजूद है। अगली सुनवाई में दोनों सरकार की ओर से पेश होने वाले वकीलों को अपना पक्ष रखना होगा। 

डीडीए के मुताबिक, डीएनडी फ्लाईओवर के समीप वैश्विक कार्यक्रम की मंजूरी सिर्फ 15 लाख रुपये की सिक्योरिटी पर दिया गया है। जबकि हाल ही में पर्यावरण मंत्रालय की ओर से की गई जांच में विशाल कार्यक्रम को आयोजित करने से पहले कई उपाय करने की सिफारिश की गई थी।
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कैमरे में कैद नहीं हो सकता कार्यक्रम स्थल का पूरा क्षेत्र 

Art of Living Program in delhi - फोटो : Amar Ujala
वहीं कार्यक्रम का दायरा महज 24 हेक्टेयर है या फिर 1000 एकड़ से भी ज्यादा। इस पर भी रिकॉर्ड में कुछ स्पष्ट नहीं है। हाल ही में एक्सपर्ट कमेटी ने अपनी जांच रिपोर्ट में कार्यक्रम स्थल पर बड़े पैमाने पर चल रहे निर्माण गतिविधियों की ओर ध्यान खींचा था। इससे कार्यक्रम की भव्यता और दायरे का अंदाजा लगाया जा सकता है।

जांच कमेटी में शामिल प्रोफेसर एके गोसाईं ने अपनी रिपोर्ट में लिखा था कि संपूर्ण कार्यक्रम स्थल को तस्वीरों में कैद करना मुश्किल है। 1200 फीट लंबा, 200 फीट चौड़ा और 40 फीट ऊंचा होगा। यह स्टील पाइप और मोटी लकड़ियों के जरिये रोका गया है।

स्टेज के शीर्ष पर फाइबर ग्लास से कवर किया जाएगा। स्टेज को इस लायक बनाया जा रहा है कि इस पर एक साथ 10 हजार से ज्यादा संगीतकार, नर्तक अपनी कला प्रदर्शित करेंगे। एनजीटी की इस मामले पर गठित एक्सपर्ट कमेटी ने जांच के दौरान बताया कि कुल पांच पैंटून पुल का निर्माण किया जाना है।

इसमें दो बड़े पैंटून पुल यमुना में और तीन छोटे बारापुला में बनाए जाएंगे। एक्सपर्ट कमेटी ने बताया कि यमुना में एक पैंटून पुल का निर्माण किया जा चुका है। कार्यक्रम स्थल पर 650 से अधिक शौचालय बनाए जा रहे हैं। 
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