कश्मीर में क्वारंटीन केंद्रों से भाग रहे लोगों का पता लगाने के लिए आतंकवादी रोधी प्रणाली का इस्तेमाल किया जा रहा है। बता दें मुखबिरों से मिली सूचना को जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी समूहों का पता लगाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
फिलहाल कश्मीर के क्वारंटीन में रखे गए करीब एक हजार लोगों की गतिविधियों पर निगरानी के लिए भी इसी हथियार का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस नई लड़ाई को लड़ रहे अधिकारियों ने बताया कि एजेंसियों ने राज्य के खुफिया तंत्र को सक्रिय किया जिन्हें ऐसे लोगों का पता लगाने और पहचान कर क्वारंटीन केंद्रों में लाने की जिम्मेदारी दी गई है।
नियमित पुलिसकर्मियों के साथ खुफिया विभाग के कर्मचारी केंद्रशासित प्रदेश में आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में सबसे आगे रहे हैं और अब वे जिला प्रशासन के साथ मिलकर विदेश यात्रा की जानकारी छिपाने वाले लोगों का पता लगाने और लॉकडाउन को सफल में बनाने में जिला प्रशासन की मदद कर रहे हैं।
अधिकारियों ने बताया कि केंद्र सरकार को सौंपी गई रिपोर्ट के मुताबिक करीब एक हजार लोग ऐसे हैं जिन्होंने राज्य के बाहर विदेश यात्रा की और उन्हें 15 से 31 मार्च के बीच क्वारंटीन केंद्र लाया गया और उनकी पहचान कर सत्यापित करने का काम चल रहा है।
उन्होंने बताया कि करीब 28,000 लोग निगरानी में हैं जिनमें 10,600 वे लोग शामिल हैं जिन्हें या तो सरकारी केंद्रों या घर में ही क्वारंटीन मं रखा गया है।
उल्लेखनीय है कि राज्य में कुल संक्रमितों की संख्या 100 के पार हो गई है जबकि दो लोगों की कोरोना वायरस से मौत हुई है। जम्मू-कश्मीर में कोरोना वायरस से अत्यधिक संक्रमण वाले कुल 34 स्थानों की पहचान की गई है।
इनमें कश्मीर संभाग के अंतर्गत पुलवामा के सात, श्रीनगर के पांच, बांदीपुरा और बडगाम के चार-चार , शोपियां के दो, गांदरबल और बारामूला के एक-एक स्थान शामिल हैं जबकि जम्मू संभाग में राजौरी के पांच, जम्मू के चार और उधमपुर के एक स्थान की पहचान कोरोना वायरस से अत्यधिक संक्रमित स्थान के रूप में की गई है।