नए विषयों से एमएससी करने में युवाओं का रुझान नहीं है। जबकि परंपरागत स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों की सीटें फुल हो रही हैं। अधिकतर युवा स्नातक और स्नातकोत्तर में एडमीशन की जगह व्यवसायिक डिप्लोमा कोर्सेज करना ज्यादा पसंद कर कर रहे हैं। पालीटेक्निक और आईटीआई में एक भी जगह खाली नहीं है।
चिन्मय डिग्री कालेज ऑफ साइंस शिवालिक नगर भेल में छह विषयों से एमएससी कराई जाती है। यहां केमिस्ट्री और जूलॉजी में 20-20 सीटें है, जबकि फिजिक्स में सीटों की केवल 15 है। सबसे अधिक सीटें माइक्रो बायोलॉजी में 25 हैं। जबकि बायोटेक और कंप्यूटर साइंस जैसे नए विषयों में 20-20 सीटें प्रवेश के लिए उपलब्ध हैं।
पिछले साल जूलॉजी की 20 में से सभी सीटों पर प्रवेश हुए वहीं इस बार भी सभी सीटें फुल हो गई। इसी तरह फिजिक्स की सभी 15 सीटों पर पिछले साल और इस बार भी प्रवेश हो गए।
इन विषयों की सीटें हैं खाली
केमिस्ट्री की 20 सीटें पिछले साल भर गई थी वहीं इस बार 18 सीटों पर प्रवेश हुए। माइक्रो बॉयोलॉजी की 25 सीटों में से पिछले साल 22 और इस साल 24 पर दाखिले हो गए।
वहीं एमएससी बॉयोटेक की 20 सीटों में से पिछले साल केवल 12 पर प्रवेश हुए तो इस बार 15 सीटें खाली रह गई और केवल पांच सीटों पर दाखिले हो सके।
आईटीआई में ले रहे प्रवेश
कंप्यूटर साइंस की 20 सीटों में से पिछले साल आठ पर प्रवेश हुए थे। जबकि इस बार 12 सीटों पर दाखिले हुए और आठ सीटें खाली रह गई। राजकीय पालीटेक्निक हरिद्वार के प्रधानाचार्य डा. राजेश उपाध्याय के अनुसार उनके यहां इलेक्ट्रॉनिक्स ट्रेड में एक भी सीट खाली नहीं है।
राजकीय आईटीआई जगीतपुर के प्रधानाचार्य राकेश वर्मा ने बताया कि उनके यहां वेल्डर, फीटर, मशीनिस्ट, इलेक्ट्रिीशियन आदि विषयों में संचालित सभी ट्रेड्स में एक भी सीट प्रवेश के लिए खाली नहीं रहती।