दिल्ली विश्वविद्यालय में 12 सितंबर को होने वाले डूसू चुनाव के लिए प्रचार अपने चरम पर है। वोट के लिए प्रत्याशी अब बाबाओं की शरण में जा रहे हैं। चौंकिए मत। ये कोई तंत्र-मंत्र वाले बाबा नहीं हैं।
दरअसल, लगातार कई सालों से डीयू की छात्र राजनीति में दखल रखने वाले पुराने छात्रों को कैंपस में बाबा कहा जाता है। डूसू चुनाव के चलते बाबा फिर से सक्रिय हैं।
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सबसे ज्यादा बाबा नॉर्थ कैंपस स्थित पीजी हॉस्टलों में सक्रिय हैं। ये जुबली हॉल, पीजी मेंस और मानसरोवर जैसे हॉस्टलों में ज्यादा रहते हैं। ये चुनाव में मतदान तो नहीं करते, मगर जाति और क्षेत्रीयता के आधार पर इनकी जूनियर छात्रों पर अच्छी पकड़ होती है। लिहाजा छात्र संगठन और उम्मीदवार इनका सहारा लेने के लिए आतुर रहते हैं।
इन बाबाओं की मदद से प्रत्याशियों को 100 से 150 तक वोट आसानी से मिल जाते हैं। इसलिए इनकी कैंपस में खासी पूछ है। वैसे भी कॉलेज की कक्षाएं समाप्त होने के बाद प्रचार के लिए प्रत्याशियों का ज्यादा फोकस हॉस्टलों पर ही रहता है।
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मालूम हो कि डीयू में कई पोस्ट ग्रेजुएट हॉस्टल हैं। इन हॉस्टलों में कुछ छात्र ऐसे भी हैं जो पढ़ाई या रिसर्च के लिए सालों से यहां डेरा जमाए बैठे हैं। इनमें से कुछ को जूनियर छात्र बाबा कहते हैं, क्योंकि ये यहीं बैठे छात्रों की समस्याओं के समाधान का दावा करते हैं।