एलयू में राष्ट्रगौरव की परीक्षा पास करने वाले स्टूडेंट को बीते एक साल से मार्क्सशीट नहीं मिल रही। कारण, परीक्षा विभाग स्टूडेंट्स से मार्क्सशीट छपवाने का खर्च मांग रहा है, जबकि परीक्षा देते समय उसने शुल्क जमा किया था।
वहीं, एमफिल पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन के स्टूडेंट को पहले सेमेस्टर में तो जीरो फीस पर दाखिला दे दिया गया।
अब दूसरे सेमेस्टर में उससे एडवांस फीस जमा करने पर ही दाखिला देने की बात कही जा रही है।
इन समस्याओं से परेशान स्टूडेंट अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं लेकिन सुनवाई नहीं हो रही। वर्ष 2011 में बीए पास करने वाले स्टूडेंट अजीत प्रताप सिंह ने राष्ट्रगौरव की परीक्षा नहीं दी थी।
वर्ष 2012 में दोबारा 600 रुपये खर्च कर राष्ट्रगौरव का एग्जाम दिया। अब स्टूडेंट यह परीक्षा पास कर चुका है लेकिन मार्क्सशीट बीते एक साल से नहीं छप रही।
स्टूडेंट्स से परीक्षा विभाग मार्क्सशीट का 600 रुपये खर्चा मांग रही है, जबकि वे एग्जाम शुल्क जमा कर चुके हैं।
छात्र नेता सहाबुद्दीन अहमद उर्फ समीर कहते हैं कि कई बार परीक्षा विभाग में चक्कर लगाए गए लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
वहीं, एमफिल के स्टूडेंट किशन लाल रावत से पहले सेमेस्टर में फीस नहीं मांगी गई और उसका जीरो फीस पर दाखिला हो गया।
अब उससे दूसरे सेमेस्टर में एडवांस फीस जमा करने पर ही दाखिला देने को कहा जा रहा है।
उसे छात्रवृत्ति अनुभाग में चक्कर काटने पड़ रहे हैं। इस बारे में एलयू के प्रवक्ता प्रो. एनके पांडेय का कहना है कि अभी तक इन मामलों को लेकर कोई जिम्मेदार अधिकारी तक नहीं आया है।
अगर स्टूडेंट आते हैं तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।