अब विदेशी यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर अंडर ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट के कोर्स चलाना भारतीय शैक्षिक संस्थानों के लिए आसान नहीं होगा।
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैडिंग (एमओयू) साइन कर विदेशी यूनिवर्सिटी के साथ कोर्स चलाने के नियम सख्त कर दिए हैं।
यूजीसी द्वारा बनाए गए भारतीय एवं विदेशी शैक्षिक संस्थानों में परस्पर अकादमिक सहभागिता के मानकों की प्रोन्नति एवं अनुरक्षण विनयम को पास कर दिया गया है।
इसके तहत अब ऐसे भारतीय संस्थान जिन्हें राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रमाणन परिषद (नैक) द्वारा कम से कम बी ग्रेड प्राप्त हो, वही विदेशी यूनिवर्सिटी से समझौता कर कोर्स चला सकेंगे।
इसके अलावा ऐसे संस्थान जिन्हें डिग्री और पीजी स्तर के कोर्स चलाने का कम से कम पांच वर्ष का अनुभव हो, वे ही विदेशी यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर कोर्स चला सकते हैं। यानी नैक ग्रेड के साथ-साथ पांच वर्ष का अनुभव भी अनिवार्य कर दिया गया है।
यूजीसी के सचिव अखिलेश गुप्ता के अनुसार इन नए विनियमों को पास कर दिया गया है। डिग्री व पीजी स्तर के कोर्स डिजाइन करते समय इस बात का विशेष ध्यान रखना होगा कि वे राष्ट्रीय सुरक्षा व गरिमा के विरुद्ध न हो।
यही नहीं, इस विनियम के तहत अब संस्थान को फ्रेंचाइची व्यवस्था के तहत कोर्स चलाने की अनुमति नहीं होगी। विनियमों के अंतर्गत ऐसी किसी भी व्यवस्था को अनुमति नहीं दी जाएगी।
जिसके अंतर्गत कोई भी विदेशी शैक्षिक संस्थान किसी भी धनराशि के एवज में उस संस्थान के नाम पर एक भारतीय शैक्षिक संस्थान को शैक्षिक गतिविधियां आयोजित करने की अनुमति दे।