रविवार को प्रस्तावित यूजीसी नेट परीक्षा के अभ्यर्थियों को व्हाइटनर लगाना भारी पड़ेगा। पिछली बार इसी मसले पर अभ्यर्थियों के आंदोलन के बाद जून की परीक्षा का परिणाम दोबारा घोषित करना पड़ा था।
लेकिन इस बार यूजीसी ने साफ कर दिया है कि उत्तर बदलने के लिए किसी भी प्रकार के तरल पदार्थ का प्रयोग वर्जित है। ऐसा करने पर संबंधित सवाल नहीं जांचा जाएगा।
जून में हुई परीक्षा में बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने उत्तर में संशोधन के लिए व्हाइटर का उपयोग किया था। यूजीसी ने ऐसे उत्तरों को रिजेक्ट कर दिया था। इसके विरोध में अभ्यर्थियों ने दिल्ली समेत कई राज्यों में प्रदर्शन किया था।
इसके बाद आयोग को दोबारा रिजल्ट घोषित करना पड़ा। परीक्षा प्रारूप में बदलाव के बाद दूसरा ऐसा मौका रहा जब आयोग को दो बार रिजल्ट घोषित करना पड़ा।
इससे नेट और जेआरएफ अभ्यर्थियों की संख्या भी अप्रत्याशित रूप से बढ़ गई। ऐसे में आयोग ने इस बार पहले ही स्पष्टीकरण जारी कर दिया है कि व्हाइटनर का उपयोग हुआ तो कोई सुनवाई नहीं होगी।
भर्ती परीक्षाओं में बदलाव का यूजीसी पर भी असर
संघ लोक सेवा आयोग तथा राज्य लोक सेवा आयोग की भर्ती परीक्षाओं में हिंदी के बढ़ते प्रभाव का यूजीसी-नेट पर भी असर है।
29 दिसंबर को होने वाली यूजीसी की इस परीक्षा में हिंदी हाट सब्जेक्ट के रूप में सामने आया है। जहां कुल अभ्यर्थियों की संख्या घटी है वहीं हिंदी से आवेदन करने वाले बढ़े हैं।
आयोग की भर्ती परीक्षाओं में हिंदी का महत्व काफी बढ़ गया है। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की समीक्षा अधिकारी/ सहायक समीक्षा अधिकारी तथा लोअर सबऑर्डिनेट भर्ती परीक्षा में तो हिंदी का ही पेपर निर्णायक होगा।
इसका असर यूजीसी नेट पर भी पड़ा है। पिछले साल दिसंबर में आयोजित होने वाली राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (नेट) के लिए कुल 28824 आवेदक थे। इनमें सबसे अधिक 5995 आवेदक प्राचीन इतिहास विषय के थे।
हिंदी विषय से नेट के लिए 4461 आवेदन हुए थे। इसके विपरीत इस बार कुल 26300 आवेदन हुए हैं। इनमें सबसे अधिक 4680 आवेदक हिंदी विषय से हैं।
इतिहास के अभ्यर्थियों की संख्या मात्र 4524 है। खास यह कि शिक्षा शास्त्र के अभ्यर्थियों की संख्या भी 2809 से बढ़कर 3045 हो गई है। इसके पीछे बीएड कालेजों की बढ़ती संख्या को कारण माना जा रहा है।