विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने नए सत्र से एमफिल और पीएचडी में नॉन रिसर्च स्कॉलरशिप खत्म कर दी है। इस फैसले से दून में भी छात्रों के बीच रोष पनपना शुरू हो गया है। छात्रों का कहना है कि यह उच्च शिक्षा के साथ खिलवाड़ है।
अब तक एमफिल छात्रों को प्रति माह पांच हजार रुपये और पीएचडी छात्रों को हर महीने आठ हजार रुपये स्कॉलरशिप मिलती थी। इससे छात्र अपनी पढ़ाई करने के साथ ही हॉस्टल या दूसरे खर्च भी चला पाते थे।
फैसले का विरोध
केंद्रीय विश्वविद्यालयों के हजारों छात्र हर साल इस खास छात्रवृत्ति का फायदा लेते हैं। यूजीसी के इस फैसले के विरोध में दून के छात्रों ने भी आवाज उठानी शुरू कर दी है।
एसएफआई के जिलाध्यक्ष विपिन जोशी ने कहा कि यह केंद्र सरकार की उच्च शिक्षा विरोधी नीति का परिणाम है। कहा कि यूजीसी के इस फैसले का पुरजोर विरोध किया जाएगा। इसके लिए कॉलेज दर कॉलेज आंदोलन भी चलाया जाएगा।