दिल्ली विश्वविद्यालय में एक साल बाद ही तीन साल के अंडरग्रेजुएट में पाठ्यक्रम में दाखिला होगा। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने डीयू के बाद उसके अंतर्गत आने वाले कॉलेजों को पत्र लिखकर मौजूदा सत्र 2014-15 में चार वर्षीय पाठ्यक्रम के बजाए तीन साल के कोर्स में दाखिला लेने का निर्देश जारी किया है।
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आयोग ने कॉलेजों के प्रिंसिपल को संबोधित करते हुए लिखे पत्र में इसे तत्काल प्रभाव से सख्ती के साथ लागू करने को कहा है। यूजीसी के नए आदेश से साफ हो गया है कि अब दाखिला तीन वर्षीय पाठ्यक्रम में ही होगा।
यूजीसी ने इससे पहले 20 जून को डीयू को सीधे पत्र लिखकर चार वर्षीय पाठ्यक्रम को वापस लेकर तीन वर्षीय प्रोग्राम में दाखिले लेने के लिए कह चुका है। अब रविवार को दोबारा सीधे कॉलेज प्रिंसिपल को पत्र लिखा है। पत्र में यूजीसी ने कॉलेजों कहा है कि वह हर हाल में तीन वर्षीय पाठ्यक्रम में दाखिला ले।
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24 को ही जारी होगी कटऑफ
यही नहीं वह इसे किस तरह करेंगे इसकी एक रिपोर्ट 23 जून (सोमवार) को आयोग को भेजे। पत्र में डीयू को भी कॉलेजों में यह लागू हो यह सुनिश्चित कराने को कहा है।
आयोग ने अपने नए आदेश में डीयू के अंतर्गत आने वाले सभी 64 कॉलेजों की सूची भी लगाई है। पत्र में उन कोर्स का भी जिक्र किया है जिसमें बी.टेक की डिग्री दिया जाना था।
आयोग ने कहा है कि सभी कॉलेजों में ऑनर्स प्रोग्राम, मानविकीय, साइंस और कॉमर्स सभी पाठ्यक्रम में तीन वर्षीय कोर्स में ही दाखिला लिया जाए। कॉलेजों से सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि वह तय समय पर ही दाखिला ले यानि डीयू की पहली कटऑफ 24 जून को ही आने की संभावना है।
डीयू के पुर्नविचार प्रस्ताव का रास्ता भी बंद
यूजीसी ने अपने आदेश में मीडिया रपट का जिक्र किया है। जिसमें कहा है कि कुछ मीडिया रिपोर्ट से पता चलता है कि डीयू की एकेडमिक काउंसिल दोबारा से विचार करने का प्रस्ताव ला रही है।
लेकिन यूजीसी ने पहले ही इस मामले में कई बार विचार कर चुकी है। अब पुर्नविचार का कोई विकल्प नहीं बचा है।
डीयू अब यह सुनिश्चित करे की मौजूदा शिक्षण सत्र में सभी तरह के कोर्स जिसमें एफवाईयूपी लागू था उसमें तीन वर्ष कोर्स में दाखिला हो। आयोग के इस आदेश से अब डीयू के पुर्नविचार के आखिरी विकल्प भी अब समाप्त हो गया है। अब आखिरी विकल्प रोलबैक का ही बचा है।
स्टैडिंग कमेटी तय करेगी पढ़ रहे छात्रों का भविष्य
डीयू में 2013-14 शिक्षण सत्र में चार वर्षीय पाठ्यक्र में दाखिला लेकर पढ़ रहे छात्रों के भविष्य पर फैसला करने के लिए यूजीसी ने एक स्टैडिंग कमेटी का गठन किया है। एफवाईयूपी को वापस लिए जाने के बाद यूजीसी के वाइस चेयरमैन की अध्यक्षता में इस कमेटी का गठन किया गया है।
यह कमेटी बीते साल से चल रहे चार वर्षीय पाठ्यक्रम को कैसे तीन साल के पाठ्यक्रम में परिवर्तित किया जाए इसे लेकर रिपोर्ट तैयार करेगी, जिससे छात्रों को नुकसान नहीं उठाना पड़े।
यूजीसी के एफवाईयूपी को वापस लेने का आदेश देने के बाद पहले से पढ़ रहे छात्रों का भविष्य को लेकर आशंकाएं बढ़ गई है। चार वर्षीय पाठ्यक्रम में दाखिला लेकर एक साल का समय फाउंडेशन कोर्स पढ़कर खराब करने वाले छात्र को अब कौन सी डिग्री मिलेगी और उनका पाठ्यक्रम कैसे पूरा होगा इसे लेकर कमेटी काम करेगी।
सेंट स्टीफन ने रोकी दाखिला प्रक्रिया
सेंट स्टीफन कॉलेज ने एफवाईयूपी पर आए नए आदेश को देखते हुए मौजूदा दाखिला प्रक्रिया पर रोक लगा दी है।
कॉलेज की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि एफवाईयूपी को लेकर कुछ दुविधा हो गई है, इसलिए फिलहाल अगला आदेश आने तक दाखिला प्रक्रिया रोक दी गई है।
हालांकि, कॉलेज ने कहा है कि ईसीए के तहत दाखिले के लिए जारी ट्रायल तय समय पर होंगे।
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने एफवाईयूपी के रोलबैक का आदेश जारी करने के साथ ही रविवार को एक पब्लिक नोटिस भी जारी किया है। इसमें आवेदन करने वाले छात्रों व अभिभावकों को रोलबैक के कारण बताते हुए तीन वर्ष के कोर्स में दाखिला लेने व फीस जमा करने की अपील की गई है।
पब्लिक नोटिस में कहा गया है कि डीयू में चल रहा चार वर्षीय पाठ्यक्रम शिक्षा की राष्ट्रीय नीति में शामिल नहीं है। यह डीयू के एक्ट-1922 की प्रक्रिया का पालन नहीं करता है, इसलिए छात्रों के हित को ध्यान में रखते हुए एफवाईयूपी को वापस लिया जा रहा है। इस संबंध में 20 और फिर 22 जून को आदेश जारी किया जा चुका है।
शिक्षण सत्र 2014-15 में दाखिले के लिए आवेदन करने वाले छात्रों से अपील है कि वे घबराएं नहीं। छात्र तीन वर्षीय पाठ्यक्रम में दाखिला लें और फीस भी तीन वर्ष के कोर्स की जमा करें।