फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

LU: एक कोर्स की जारी की दो-दो मेरिट लिस्ट

Sat, 30 Aug 2014 03:35 AM IST
आशीष कुमार त्रिवेदी/अमर उजाला, लखनऊ
विज्ञापन
विज्ञापन
लखनऊ विश्वविद्यालय में पीजी कोर्सेज में एडमिशन में व्यापक स्तर पर गड़बड़ी हुई है। एक ही विषय के दो-दो फॉर्म जारी किए गए, दो लिस्ट भी जारी हुईं।
विज्ञापन


नतीजा हुआ कि ज्यादा नंबर वालों को तो सेल्फ फाइनेंस की सीट मिली, वहीं कम नंबर वालों को रेग्युलर सीट मिल गई। रेग्युलर कोर्स के मुकाबले सेल्फ फाइनेंस कोर्स की फीस करीब चार गुना है।

जब मेरिट सूची जारी हुई तो स्टूडेंट्स के भी होश उड़ गए। छात्रों ने पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन विभाग में चक्कर लगाने शुरू कर दिए।

अब गलती उजागर होने के बाद यूनिवर्सिटी प्रशासन बैकफुट पर आ गया। पीजी में अब पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन कोर्स की संशोधित मेरिट लिस्ट जारी की जाएगी।

लखनऊ विश्वविद्यालय में पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन कोर्स में 40 रेग्युलर व 40 सीटें सेल्फ फाइनेंस की हैं। 10 सीटें इस्पांसर्ड हैं।

यूनिवर्सिटी में पीजी कोर्स में ऑनलाइन फॉर्म जारी करने में ही गड़बड़ी हो गई। मॉस्टर्स इन पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन (एमपीए) व एमए इन पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन दो कोर्सेज के फॉर्म जारी कर दिए गए।
विज्ञापन


एमए इन पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में सेल्फ फाइनेंस कोर्सेज की सीटें दिखा दीं और मास्टर्स इन पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में रेग्युलर की 40 सीटें शामिल कर दीं। इससे स्टूडेंट्स में भ्रम हो गया।

एमए इन पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन कोर्स में 111 फॉर्म आए और मॉस्टर्स इन पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन जो कि असली कोर्स है, उसमें मात्र 54 आवेदन फॉर्म आए।

इसमें ज्यादा नंबर वालों को सेल्फ फाइनेंस की सीटें मिलीं और कम नंबर वालों को रेग्युलर की सीटें मिल गईं।

मालूम हो कि रेग्युलर की फीस 3825 प्रति सेमेस्टर व सेल्फ फाइनेंस की 16,000 रुपये प्रति सेमेस्टर फीस है।

मेरिट सूची जारी होने के बाद स्टूडेंट्स में हड़कंप मच गया। इसके बाद बड़ी संख्या में ऊंची मेरिट वाले स्टूडेंट पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन विभाग पहुंच गए।

इसके बाद स्टूडेंट्स ने इसकी लिखित शिकायत कुलपति डॉ. एसबी निमसे से की। इसके बाद स्टूडेंट्स को बताया गया कि यहां केवल मॉस्टर्स इन पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन (एमपीए) कोर्स ही चलाया जाता है।

इसी कोर्स के नाम से फॉर्म जारी किए जाने चाहिए थे और जब इसमें अच्छे नंबर वाले से रेग्युलर कोर्स की सीटें भर जाती तो कम नंबर वाले स्टूडेंट्स को इसी कोर्स के सेल्फ फाइनेंस सीट पर प्रवेश मिलता।

अब यूनिवर्सिटी प्रशासन संशोधित मेरिट लिस्ट जारी करने पर विचार कर रही है।

आखिर एक कोर्स को दो कोर्स क्यों बना दिया
एलयू में मॉस्टर्स इन पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन (एमपीए) कोर्स ही चल रहा है। दरअसल, करीब पांच साल पहले जब यूजीसी ने नामावली बदलने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन को निर्देश दिए थे उस समय एमपीए कोर्स का नाम बदलकर इसे एमए इन पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन कर दिया।

केवल एक साल ही इस नाम से कोर्स चला। इसके बाद फिर इसे एमपीए नाम से ही चलाया जा रहा है। रजिस्ट्रार कार्यालय से जब पीजी एडमिशन के लिए सूची मांगी गई तो इसमें एमपीए की जगह एमए इन पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन कोर्स नाम भेजा गया।

आर्ट्स का स्टूडेंट्स बीकॉम की मेरिट लिस्ट में
आर्ट्स से इंटरमीडिएट वाले स्टूडेंट्स को बीकॉम की मेरिट लिस्ट में शामिल कर दिया गया।

यूनिवर्सिटी प्रशासन की लापरवाही के कारण एक स्टूडेंट ने इंटरमीडिएट आर्ट्स सब्जेक्ट से पास करने के बाद बीकॉम में फॉर्म भर दिया, जबकि बीकॉम में इंटरमीडिएट कॉमर्स साइड से पास होना अनिवार्य है।
विज्ञापन


यही नहीं, यूनिवर्सिटी प्रशासन ने इसकी मेरिट भी बना दी। मामला तब पकड़ा गया जब यह फीस जमा करने व डॉक्युमेंट वेरिफिकेशन के लिए पहुंचा।

इसके बाद अब स्टूडेंट ने एलयू को लिखित प्रार्थना पत्र दिया है कि उसे बीए कोर्स में समायोजित कर दिया जाए। इस एक स्टूडेंट ने बीकॉम का फॉर्म भरकर पूरी व्यवस्था पर ही सवाल उठा दिए हैं।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें