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केंद्र-राज्य के 'कंफ्युजन' में छात्रों की 'बत्ती गुल'

Thu, 19 Sep 2013 11:23 AM IST
अमर उजाला, देहरादून
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प्रतियोगी परीक्षाओं के आयोजन में राज्य और केंद्र स्तर के आयोग फिर आमने-सामने आ गए हैं। उत्तराखंड लोक सेवा आयोग की पॉलीटेक्निक लेक्चरर परीक्षा और कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी) की संयुक्त स्नातक मुख्य परीक्षा 29 सितंबर को होनी है। ऐसे में कई युवाओं को इनमें से एक परीक्षा मजबूरन छोड़नी पड़ सकती है।
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उत्तराखंड लोक सेवा आयोग ने 22 मार्च 2012 को पॉलीटेक्निकों में 396 लेक्चरर पदों के लिए नियुक्तियां निकाली थी। इसमें बीटेक से लेकर सामान्य बीएससी और एमए अंग्रेजी के छात्रों को भी योग्य माना गया था। लंबे इंतजार के बाद परीक्षा की तिथि 29 सितंबर तय की गई।

एडमिट कार्ड बंटने शुरू हो गए, लेकिन अब पता चला कि एसएससी ने पहले ही इस तारीख पर संयुक्त स्नातक स्तर मुख्य परीक्षा तय कर रखी है। एक अभ्यर्थी ने बताया कि दोनों ही मौके अच्छे हैं। इनमें से एक भी छूटा तो ताउम्र रंज रहेगा। ऐसे कई अभ्यर्थी हैं, जो कि दोनों परीक्षाओं की तिथि एक ही दिन होने की वजह से बेहद परेशान हैं।
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पहले क्यों नहीं जागते
हाल के महीनों में ऐसे कई मामले प्रकाश में आए हैं, जिनमें राज्य और राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं की तिथि एक ही तय की गई। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर राज्य स्तर पर परीक्षा तिथि तय करते वक्त राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा तिथि का ख्याल क्यों नहीं रखा जाता। अहम बात यह है कि यूपीएससी से लेकर एसएससी तक सभी केंद्रीय आयोग अपनी परीक्षाओं का कैलेंडर वर्ष की शुरुआत में ही जारी कर देते हैं।

आयोग को ही नहीं जानकारी
उत्तराखंड लोक सेवा आयोग के सचिव रंजीत सिन्हा से तिथियों के बारे में बात की गई तो उन्होंने इस पर अनभिज्ञता जाहिर की। उनका दावा है कि पॉलीटेक्निक लेक्चरर भर्ती परीक्षा में केवल बीटेक अभ्यर्थियों को ही योग्य माना गया है। ऐसे में एसएससी की सामान्य स्नातक परीक्षा वाले छात्रों का इससे कोई मतलब नहीं है। जबकि, सचाई यह है कि लेक्चरर परीक्षा में फिजिक्स, कैमिस्ट्री, मैथ्स और अंग्रेजी विषयों के लिए भी हो रही है, जिसमें सामान्य एमएससी और एमए छात्र योग्य माने गए हैं।
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