विद्यालय की क्षमता है 600 और एक क्लास में दाखिले हैं 1120। यह मामला है नन्हें सिंह स्मारक इंटर कॉलेजों का, जिसने 10वीं में 580 और इंटर में 1120 फॉर्म भरवाए हैं।
आवेदन करते वक्त विद्यालय की कुल धारण क्षमता 800 बताई थी ओर डीआईओएस के निरीक्षण में यह 600 पाई गई। अब सवाल उठता है कि आखिर 600 धारण क्षमता वाले स्कूल में एक ही कक्षा में 1120 पंजीकरण कैसे हो सकते हैं।
लेकिन इस गड़बड़झाले पर अधिकारी नजर मूंदे बैठे हैं और फर्जी पंजीकरण का खेल खुलेआम चल रहा है। माल स्थित नन्हें सिंह स्मारक इंटर कॉलेज ने वर्ष 2014 की बोर्ड परीक्षा में केंद्र बनाने के लिए आवेदन किया था।
उस समय विद्यालय में 25 कमरे, प्रयोगशाला, पुस्तकालय के साथ ही धारण क्षमता 800 स्टूडेंट्स का दावा किया था। जिला विद्यालय निरीक्षक द्वारा गठित जांच समिति ने मुआयना किया तो पता चला कि विद्यालय में 21 कमरे हैं।
प्रयोगशाला और पुस्तकालय नहीं है। परीक्षा केंद्र के लिए न्यूनतम धारण क्षमता 600 ही थी इसलिए विद्यालय में परीक्षा केंद्र बना दिया गया। इस साल बोर्ड परीक्षा फॉर्म भरे जा चुके हैं।
20 सितंबर को कॉलेजों से भरे गए बोर्ड परीक्षा फॉर्म का आंकड़ा निकाला गया तो फिर सभी दंग रह गए। नन्हें सिंह स्मारक इंटर कॉलेज से कक्षा 12 में कुल 1,120 परीक्षा फॉर्म भरे गए हैं।
हाईस्कूल में इस कॉलेज से 580 स्टूडेंट्स के परीक्षा फॉर्म भरे गए हैं। इस तरह से केवल दो क्लास में ही यहां से 1700 स्टूडेंट्स होते हैं। विद्यालय कक्षा छह से 12 तक चलता है।
बाकी कक्षाओं में अगर 100-100 स्टूडेंट्स होंगे तो विद्यालय की कुल संख्या कम संख्या 2,200 स्टूडेंट्स की हो जाएगी। अब जिस विद्यालय में केवल 600 बच्चों की परीक्षा कराई जा सकती हो।
वहां 2,200 स्टूडेंट्स की पढ़ाई कैसे संभव होगी, यह सोचने वाली बात है। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ की मानें तो विद्यालय में खुले तौर पर फर्जी पंजीकरण का खेल खेला जा रहा है। निरीक्षण किया जाए तो हकीकत सामने आ जाएगी।