एमडी शुक्ला इंटर कॉलेज में एनसीसी की मान्यता सस्पेंड करने का मामला तूल पकड़ने लगा है।
कॉलेज के प्रधानाचार्य ने कम छात्र संख्या की वजह से मान्यता सस्पेंड करने का कारण जानने के लिए एनसीसी निदेशालय में आरटीआई डालने की बात कही है।
मान्यता बहाल न होने पर प्रधानाचार्य ने हाईकोर्ट की शरण में जाने का मन भी बना लिया है।
दूसरी ओर, राजधानी के अन्य अनुदानित कॉलेज के शिक्षकों ने एनसीसी की मान्यता सस्पेंड करने को साजिश करार दिया है।
शिक्षकों के अनुसार एनसीसी निदेशालय में अनुदानित कॉलेजों से मान्यता लेकर निजी कॉलेजों को देने का खेल खेला जा रहा है।
एनसीसी ग्रुप हेडक्वार्टर्स की ओर से 14 अगस्त को पत्र जारी करके जारी एमडी शुक्ला इंटर कॉलेज में एनसीसी की मान्यता समाप्त कर दी गई है।
इसके पीछे कॉलेज में कम छात्र संख्या होने की बात कही जा रही है। इस पर राजधानी के अनुदानित कॉलेजों ने आक्रोश जताया है।
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेशीय प्रवक्ता एवं मंत्री के अनुसार सरकारी और अनुदानित स्कूलों में एनसीसी की मान्यता समाप्त करने के कोशिश गहरी साजिश है।
सरकारी और अनुदानित स्कूलों की मान्यता समाप्त करके निजी स्कूलों को मान्यता बांटी जाएगी। इसके बाद वहां पर स्टूडेंट्स से फीस वसूलने के साथ ही बाकी सामग्री में भी खेल किया जाएगा।
सरकारी और अनुदानित स्कूलों में एनसीसी की मान्यता समाप्त करना पूरी तरह से साजिश है। सच्चाई यह है कि एनसीसी निदेशालय की ओर से ही ट्रेनिंग देने में लापरवाही बरती जाती है।
नया सत्र शुरू हुए डेढ़ महीने से ज्यादा समय बीत चुका है। इसके बावजूद अभी तक एक दिन भी एनसीसी निदेशालय की ओर से कोई इंस्ट्रक्टर कैडेट्स को ट्रेनिंग देने नहीं आया है।