सरकारी प्राथमिक और जूनियर स्कूलों को पब्लिक स्कूलों की तरह बनाने की कवायद शुरू की गई है। अब जिले के 18 स्कूलों में सुरताल के साथ जहां पढ़ाई की शुरुआत होगी। वहीं रोजाना की कई गतिविधियों में बड़ा बदलाव आएगा। शिक्षा विभाग की ओर से 71 लाख रुपया जारी कर दिया गया। राजकीय स्कूलों में कम होती छात्र संख्या से निजात पाने के लिए सरकार कुछ स्कूलों को मॉडल स्कूल बनाने जा रही है।
हरिद्वार जिले में 12 प्राइमरी और छह जूनियर को मिलाकर कुल 18 स्कूलों को इसके लिए चयनित किया गया है। प्रत्येक ब्लॉक से दो प्राइमरी और जूनियर शामिल हैं। इन स्कूलों में अब सुबह की प्रार्थना हारमोनियम, ढोलक, मंजीरा और ढपली से सुरताल के साथ होगी। तेज आवाज और पब्लिक एड्रेस के लिए माइक, एम्पली फायर, हॉर्न सिस्टम आदि भी उपलब्ध रहेंगे। बच्चों को सिर से लेकर जूते तक साफ सफाई और यूनिफॉर्म देखने के लिए एक एक आदमकद शीशा भी खरीदा जाएगा।
बच्चे जहां अभी तक फर्श पर बैठते रहे हैं वहीं अब पहली कक्षा से ही कुर्सी मेज बैठने के लिए मिलेगी। मैदान के अलावा सरकारी स्कूलों में खेलने का कोई सामान नहीं होता था। लेकिन अब बैडमिंटन रैकेट, शटल कॉक, फुटबॉल, वालीबॉल, रस्सीकूद, फ्लाइंग डिश, हाईजंप, ड्रम, झांझ, बिगुल, लेजियम और डंबल आदि मिलेंगे। कक्षा कक्षों को लर्निंग कार्नर के रुप में विकसित किया जाएगा।
सभी स्कूलों के प्रधानाध्यापकों और संबंधित ब्लॉक के सहायक खंड शिक्षा अधिकारियों के साथ बैठक कर निर्देश दे दिए गए हैं। बहुत जल्द सामान क्रय कर गतिविधि संचालित कर दी जांएगी।
- रामेंद्र कुशवाहा, जिला परियोजना अधिकारी एसएसए