शुल्क प्रतिपूर्ति में हुए घपलों को रोकने के लिए पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग ने कवायद शुरू कर दी है। इसके लिए नई नियमावली तैयार की जा रही है।
इसमें बजट से ज्यादा मांग होने पर प्राथमिकता क्रम तय होगा। साथ ही विद्यार्थियों को विभाग की वेबसाइट पर खुद ही अपना डाटा फीड करने की सहूलियत भी दी जाएगी।
पिछले सत्र में शुल्क प्रतिपूर्ति में गड़बड़ी को लेकर तत्कालीन पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री ने निदेशालय को पत्र भेजा था। इसे रोकने के लिए पिछड़ा वर्ग कल्याण निदेशालय ने प्रयास शुरू कर दिए हैं।
इसी के तहत नई नियमावली तैयार करने की जिम्मेदारी संयुक्त निदेशक रामकेवल को दी गई है। सूत्रों के मुताबिक, यह नियमावली लगभग तैयार हो चुकी है। सत्र 2013-14 में सबसे पहले सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त संस्थानों में पढ़ने वालों की शुल्क प्रतिपूर्ति की जाएगी।
किसे मिलेगी वरीयता?
उसके बाद निजी संस्थानों में फ्री सीट और फिर पेड सीट पर दाखिला लेने वालों का नंबर आएगा। मांग से कम बजट होने पर निजी संस्थानों के उन विद्यार्थियों को तरजीह दी जाएगी, जिनके पिछली कक्षा में अंक अच्छे हैं।
कई विद्यार्थियों के अंक समान होने पर कम आय वर्ग वाले विद्यार्थियों को प्राथमिकता दी जाएगी। आय एक बराबर होने पर जन्मतिथि को आधार बनाया जाएगा। कम उम्र के विद्यार्थियों को मेधावी मानते हुए तरजीह दी जाएगी।
वहीं, इन सभी मानदंडों पर तमाम विद्यार्थियों के एक समान स्तर पर होने की स्थिति में ‘पहले आओ, पहले पाओ’ को आधार बनाया जाएगा।
पहले साल की फीस की दूसरी किस्त तभी दी जाएगी, जब छात्र पहले सेमेस्टर की परीक्षा में बैठा हो और दूसरे सेमेस्टर में दाखिला ले लिया हो।
उधर, अभी तक संस्थान एनआईसी के मार्फत छात्रों का डाटा फीड करते रहे हैं, लेकिन अब छात्र सीधे ही विभाग की वेबसाइट पर अपने से संबंधित जानकारी अपलोड करेंगे।
विभागीय अफसरों का कहना है कि पारदर्शिता के लिहाज से शासन ने भी इसे हरी झंडी देने के संकेत दे दिए हैं।