लखनऊ विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव का मुद्दा गर्मा गया है। चुनाव की मांग को लेकर छात्रनेता लगातार कुलपति डॉ. एसबी निमसे का घेराव कर रहे हैं।
छात्रनेताओं के साथ हुई बातचीत के बाद लविवि प्रशासन ने प्रमुख सचिव (उच्च शिक्षा) को इस संबंध में पत्र लिखकर विश्वविद्यालय के वर्गीकरण के बारे में जानकारी मांगी है।
लविवि प्रशासन का कहना है कि लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों के अनुसार शासन को बताना है कि यूनिवर्सिटी बड़ी यूनिवर्सिटी की श्रेणी में है या छोटी यूनिवर्सिटी की श्रेणी में।
लविवि के प्रवक्ता प्रो. एनके पांडेय का कहना है हमने कभी चुनाव करवाने से मना नहीं किया मगर जो विधिक प्रक्रिया है, उसका पालन किए बगैर चुनाव करवाने में दिक्कत है।
छात्रनेताओं के दबाव में पत्र तो शासन को लिख दिया लेकिन चुनाव होना अभी दूर की कौड़ी है क्योंकि इससे पहले कानपुर के पीपीएन कॉलेज के छात्रसंघ चुनाव को लेकर कोर्ट में लगाई गई याचिका और खुद लविवि के छात्रनेता हेमंत सिंह की उम्र सीमा संबंधी याचिका पर वर्गीकरण के बारे में कोर्ट शासन से जवाब मांग चुका है।
जानकार मानते हैं कि लविवि बड़ी यूनिवर्सिटी की श्रेणी में आ सकता है क्योंकि लिंगदोह कमेटी की जो संस्तुतियां हैं उसमें विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों की संख्या काफी ज्यादा है।
ऐसे में यूनिवर्सिटी से संबद्ध कॉलेजों में छात्र प्रतिनिधि चुने जाएंगे और लविवि में भी छात्र प्रतिनिधि चुने जाएंगे। कॉलेज में छात्र प्रतिनिधि ही पदाधिकारियों को चुनेंगे।
बाद में वे पदाधिकारी आगे लविवि में चुने गए प्रतिनिधियों के साथ मिलकर अध्यक्ष, उपाध्यक्ष व महामंत्री को बहुमत के आधार पर चुनेंगे।