एलयू में शोध छात्रा ने अपने गुरुजी पर उत्पीड़न का आरोप लगाया है। हिन्दी विभाग की शोध छात्रा ने विवि प्रशासन को पत्र लिखकर बताया कि बीते दो वर्षों से उसे बेवजह परेशान किया जा रहा है।
उसके बाद एलयू ने शोध पर्यवेक्षक को बदल दिया है। यूनिवर्सिटी प्रशासन का कहना है कि छात्रा रिसर्च के साथ-साथ प्रतियोगी परीक्षा की भी तैयारी कर रही थी। शिक्षक ने उसे इसकी पूरी छूट दी।
लेकिन थीसिस के मामले पर छात्रा क्लीयर नहीं थी। उसने खुद पर्य वेक्षक बदलने की मांग की थी। इस मामले में कोई विवाद की स्थिति नहीं है।
एलयू में हिन्दी विभाग की शोध छात्रा ने अपने शिक्षक पर उसके जेआरएफ के कागज क्लीयर न करने का आरोप लगाया है। छात्रों के मुताबिक इसके चलते उसे परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
इसी वजह से उसे यूजीसी से मिलने वाली वित्तीय मदद भी नहीं मिल पा रही। छात्रा ने विवि प्रशासन को लिखे पत्र में बताया कि वह अब उनके निर्देशन में पीएचडी नहीं कर सकती।
एलयू के प्रवक्ता प्रो. एनके पांडेय ने बताया कि मामला उनके संज्ञान में है। उन्होंने शिक्षक से इस मसले पर विस्तृत बात कर उनका पक्ष लिया है।
शिक्षक ने हमें बताया कि यह छात्रा पीएचडी के साथ-साथ प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रही थी। छात्रा ने तैयारी के लिए जो छूट मांगी उसे दी गई। मगर पीएचडी की थीसिस तैयार करने को लेकर छात्रा भ्रम में थी।
वह अपने शिक्षक की बात को ढंग से नहीं समझ पा रही थी। खुद शिक्षक भी थीसिस को लेकर उसे नहीं समझ पा रहे थे।
छात्रा ने अपना शोध पर्यवेक्षक बदलने की मांग की तो यूनिवर्सिटी ने शोध पर्यवेक्षक को बदल दिया। फिलहाल छात्रा ने इस मामले में कोई गंभीर शिकायत नहीं की है।