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61 हजार छात्रों पर चार शिक्षक, बड़ी नाइंसाफी है...

Sun, 11 May 2014 03:20 PM IST
आफताब अजमत/ अमर उजाला, देहरादून
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उच्च शिक्षा के प्रति सरकारी सुस्ती का इससे बेहतर नमूना क्या होगा। तीन साल पहले बने श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विवि में कुलपति और कुलसचिव के अलावा दो डेपुटेशन वाले स्थायी कर्मचारी हैं।
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इस बार 61 हजार छात्रों का बोझ
पिछले वर्ष से प्राइवेट परीक्षा करा रहे इस विवि पर इस बार 61 हजार छात्रों का बोझ है। यह संख्या पिछले साल दोगुनी है।
 
चौंकाने वाली बात यह है कि इतनी बड़ी परीक्षा बिना परीक्षा नियंत्रक ही आयोजित होगी। ऐसे में यदि जरा भी चूक हुई तो सीधे 61 हजार छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ होगा।

पंडित दीनदयाल उपाध्याय उत्तराखंड विवि की स्थापना चार नवंबर 2011 को हुई थी। 19 अक्तूबर 2012 को इसका नाम बदलकर श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विवि कर दिया गया।

इस बीच विवि में डा. यूएस रावत को कुलपति और प्रो. एके तिवारी को कुलसचिव नियुक्त किया गया। दो कर्मचारी गढ़वाल विवि से डेपुटेशन पर बुलाए गए।

15 संविदा कर्मचारियों के भरोसे विवि
इन चार लोगों के अलावा करीब 15 संविदा कर्मचारियों के भरोसे तीन साल यह विवि चल रहा है। 40 पदों पर भर्ती का प्रस्ताव शासन में धूल फांक रहा है।

इसमें परीक्षा नियंत्रक, डिप्टी रजिस्ट्रार, वित्त नियंत्रक जैसे कई अहम पद हैं। शासन तीन साल से सेवा नियमावली को हरी झंडी नहीं दे पाया है।

59 केंद्रों पर 12 से शुरू होंगी परीक्षाएं
श्रीदेव सुमन विवि की परीक्षाओं के लिए गढ़वाल मंडल में कुल 59 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं, जिनमें से सात देहरादून में हैं।
दून में एमकेपी पीजी कॉलेज, एसजीआरआर पीजी कॉलेज, एनडब्ल्यूटी रायपुर, सांई इंस्टीट्यूट, उत्तरांचल कॉलेज ऑफ बायोमेडिकल साइंस, बाबा फरीद इंस्टीट्यूट और आईटीएम चकराता रोड को केंद्र बनाया गया है।
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विवि ने 12 मई से शुरू होने जा रही यूजी परीक्षाओं के एडमिट कार्ड संबंधित परीक्षा केंद्रों पर भेज दिए हैं जबकि 20 मई से शुरू होने जा रही पीजी प्राइवेट परीक्षाओं के एडमिट कार्ड 15 मई तक भेज दिए जाएंगे।

सरकारी सुस्ती का यह पड़ रहा असर
- स्टाफ न होने की वजह से गत वर्ष 30 हजार छात्रों का परीक्षा परिणाम घोषित करने में करीब आठ महीने लग गए।
- परीक्षा केंद्रों का निर्धारण, प्रश्न पत्र और अन्य सभी परीक्षा संबंधित काम करने वाले परीक्षा नियंत्रक का पद खाली होने से चार कर्मचारियों पर दबाव है।

- सेवा नियमावली को शासन की स्वीकृति न मिल पाने से नई भर्तियों का रास्ता नहीं खुल पाया है।
- प्रश्न पत्र के सेट तो तैयार हो गए हैं लेकिन कहीं भी पेपर नहीं पहुंचा या आउट हुआ तो स्थिति संभलना मुश्किल हो सकता है।

- विवि से प्रदेश के सभी राजकीय व अशासकीय महाविद्यालय भी संबद्ध होने हैं, लेकिन स्टाफ न होने की वजह से यह काम नहीं हो पाया है।

हमने तैयारियां कर ली हैं। मजबूत व्यवस्थाओं के साथ परीक्षा शुरू होने जा रही है। नई भर्ती का मामला शासन के पाले में है। जैसे ही निर्देश आएंगे, शुरू कर दी जाएगी।
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- प्रो. एके तिवारी, कुलसचिव
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