आपकी एक सोच और उसके पीछे ईमानदार मेहनत आपकी दुनिया बदल सकती है। जरूरत उसके साथ मिलकर आगे बढ़ने और लोगों को जोड़ने की है।
रविवार को टेडएक्स, किरोड़ीमल कॉलेज व अमर उजाला की ओर से आयोजित एक संगोष्ठी में ऐसे ही कुछ लोगों ने अपने जीवन की कहानी लोगों को सुनाई और आगे बढ़ते रहने की सलाह दी।
कार्यक्रम की शुरुआत शौचालय का म्यूजियम देने वाले बिंदेश्वरी पाठक के अनुभव से हुई। उन्होंने बताया कि कैसे उनका एक आइडिया आज देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में लोगों के लिए जिज्ञासा का विषय बना हुआ है। साथ ही इसकी मदद से कैसे उन्होंने दूसरे कामों से जरूरतमंदों की राह आसान बनाई।
यही नहीं, सुलभ से जुड़े एक छोटे से गांव की महिला कैसे विदेशों तक गई, उसके बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि सोच को रूप देकर उसके साथ आगे बढ़ने से ही कुछ बनता है।
इसके बाद रॉक बैंड चलाने वाले लोकेश मदान ने अपनी कहानी बताई। लोकेश एक निजी कंपनी में महाप्रबंधक का पद छोड़कर कैसे 9 साल बाद फिर से म्यूजिक से जुड़े और उसमें सफलता पाई। उन्होंने कहा कि पैशन और सोच को ईमानदार तरीके से आगे बढ़ाया जाए तो सफलता जरूर मिलती है।
निजी कंपनी के सीईओ अंकुर वारिकू ने बताया कि कूल्हे की हड्डियों में बीमारी होने के बावजूद उन्होंने दिल्ली हाफ मैराथन में 21 किलोमीटर की दौड़ पूरी की। जबकि उन्हें उस समय डॉक्टर ने चलने से भी मना किया था।
अपनी कहानी सुनाने वालों में आर्किटेक्चर मनीत रस्तोगी ने अपना आइडिया रखा। वहीं शिफू कनिष्का शर्मा ने वूमेन सेफ्टी के बारे में बताया। उसका प्रदर्शन भी संगोष्ठी में किया। संगोष्ठी में किरोड़ीमल कॉलेज के अलावा दूसरे कॉलेज के छात्रों ने भी हिस्सा लिया।