अमीर ‘गरीबों’ ने बड़े ही नहीं छोटे नामी स्कूलों में दाखिलों के लिए बड़ा खेल खेला है। पड़ोस के प्ले स्कूल में दाखिला कराया तो प्रोफेशन बिजनेस बताया और इसके बाद जब नामी स्कूल में दाखिला कराया तो गरीब बन गए।
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आलीशान घर के मालिक या आलीशान कोठी में किराएदार लोगों ने नियमों की धज्जियां उड़ाकर इस साल स्कूलों में आरटीई में दाखिले करा लिए हैं। अमर उजाला की टीम ने जब इन घरों का मुआयना किया तो कई चौंकाने वाले सच सामने आए।
केस 1
नाम : आशीष कुमार वर्मा, पता : 202, खुड़बुड़ा मोहल्ला। आशीष पेशे से इलेक्ट्रिशियन का काम करते हैं और इस पते पर शानदार कोठी में किराए पर रहते हैं। कोठी के हिसाब से उनका किराया चार से पांच हजार रुपये महीना होगा। आशीष ने बेटे का एडमिशन स्टेपिंग स्टोन स्कूल में इसी साल आरटीई के तहत कराया है। मोहल्ले वालों के मुताबिक किराए पर होने के बावजूद उनकी हैसियत के हिसाब से देखें तो वह आरटीई के नियमों में फिट नहीं बैठते हैं।
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इनके मंहगे आशियाने तो देखेंगे तो आप भी समझेंगे असलियत
केस 2 नाम : मनोज आनंद, पता : 130/2, गुरु रोड़, पटेलनगर, पेशा : एक सरकारी कंपनी में जॉब। दो मंजिला आशियाना। मनोज आनंद ने अपने बच्चे का दाखिला पटेलनगर स्थित स्टेपिंग स्टोन स्कूल में आरटीई के तहत कराया है। पड़ोस के लोगों के मुताबिक मनोज बीएसएनएल में जॉब करते हैं। हालांकि उनके पेशे की पुष्टि नहीं हो पाई। लेकिन मोहल्ले में उनके मकान और हैसियत से सभी वाकिफ हैं। वह आरटीई के क्राइटेरिया में नहीं आते हैं।
केस 3 प्ले स्कूल में बिजनेसमैन, आरटीई में गरीब नाम : अमित कुमार, पता : 149, सहारनपुर रोड, पटेलनगर, पेशा : इनवर्टर और पॉलिसी का काम। अमित कुमार ने मोहल्ले के प्ले स्कूल में जब बच्चे का दाखिला दिलाया तो एडमिशन फार्म पर प्रोफेशन बिजनेस लिखा। उनके दो बच्चे इस स्कूल में पढ़ते थे। इनमें से बेटे का दाखिला इसी साल आरटीई से निकट के स्टेपिंग स्टोन स्कूल में कराया है। यहां उन्होंने अपनी मासिक आय चार हजार रुपये बताई है। एक साल पहले तक खुद को बिजनेसमैन बताने वाले अमित अब गरीब बन गए हैं।
स्कूल ने उठाए दाखिलों पर सवाल, लौटाई सूची
आरटीई के तहत अपात्रों को दिए जा रहे दाखिलों की खुलती पोल के बीच जसवंत मॉडर्न स्कूल भी सामने आया है। स्कूल ने शिक्षा विभाग को इस साल भेजी गई दाखिला सूची लौटा दी है। कहा है कि जिनका चयन आरटीई के तहत किया गया है, पहले उनकी जांच कर लें। वह कहीं से भी पात्र नहीं लग रहे हैं।
जसवंत मॉडर्न की प्राचार्य मीनाक्षी गंडोत्रा की ओर से नगर शिक्षा अधिकारी को इस आशय का पत्र भेजा गया है। पत्र में कहा गया है कि जिन बच्चों का चयन इस बार आरटीई के तहत किया गया है, वह आरटीई के तहत गरीब व अपवंचित वर्ग की श्रेणी के नहीं लगते।
पत्र में कहा है कि दिल्ली में भी इस तरह का फर्जीवाड़ा सामने आ चुका है। पहले इन चयनित छात्रों के घरों की जांच कर ली जाए, उनके अभिभावकों का स्टेटस पता कर लिया आए। इसकी जांच करने के बाद दोबारा सूची भेज देंगे तो वह दाखिला दे देंगी। स्कूल की ओर से पहली बार किसी आरटीई दाखिले पर ऐसा सवाल उठाया गया है।
अमर उजाला में लगातार खुलती आरटीई के कथित गरीबों की पोल के बाद शिक्षा महानिदेशक डी सेंथिल पांडियन ने मुख्य शिक्षा अधिकारी से मामले की जांच कर, रिपोर्ट तलब की है।
इस कड़ी में अपर परियोजना निदेशक डॉ. सती ने संबंधित अधिकारियों से जल्द से जल्द मौके पर मुआयना कर रिपोर्ट देने को कहा है। शिक्षा विभाग इस फर्जीवाड़े पर सख्ती के मूड में नजर आ रहा है और ऐसे फर्जी दाखिलों को रद्द किया जा सकता है। मुख्य शिक्षा अधिकारी एसपी खाली ने बताया कि उन्होंने मामले की जांच शुरू करा दी है।
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