शिक्षा निदेशालय ने स्कूलों को इंटर स्टेट ट्रांसफर सर्टिफिकेट की सत्यता जांचने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही निजी स्कूलों को प्रमाणपत्र जारी होने के स्रोत का भी सत्यापन करना होगा। स्कूल वेरिफिकेशन कर रहा है या नहीं, इसके लिए निदेशालय एक टीम गठित करेगा।
वहीं, इस केटेगरी के तहत जोड़तोड़ से दाखिला कराने पर माता-पिता के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। अतिरिक्त शिक्षा निदेशक (एक्ट-1) डॉक्टर मधु रानी तेवतिया ने निजी स्कूलों को इंटर स्टेट ट्रांसफर सर्टिफिकेट केटेगरी के तहत दाखिला पाने के लिए जोड़तोड़ को रोकने को कहा है।
पढ़ें: नर्सरी दखिले में नवयुग स्कूल पर भेदभाव का आरोप
स्कूलों को इस केटेगरी के तहत प्राप्त आवेदनों का डाटा तैयार करना होगा। विशेष रूप से आवेदनों की संख्या और जहां से ट्रांसफर हुआ हो उसका डाटा तैयार करना होगा। यदि स्थानांतरण श्रेणी के तहत आवेदक की वास्तविकता को संदिग्ध पाते हैं तो वह आवेदक को इंटर स्टेट ट्रांसफर के पांच अंक न दें।
स्कूल को निदेशालय की टीम निरीक्षण करने के समय इंटर स्टेट ट्रांसफर सर्टिफिकेट प्रस्तुत करना होगा। यदि स्कूल इन आदेशों का पालन नहीं करते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। उल्लेखनीय है कि इस श्रेणी के तहत प्रमाण पत्र को लेकर सवाल उठ रहे थे। अभिभावक आरोप लगा रहे थे कि ट्रांसफर सर्टिफिकेट के नाम पर फर्जी प्रमाणपत्र बन रहे हैं।
फर्जी मामलों पर लगाम लगने की उम्मीद
एडमिशन नर्सरी डॉट कॉम के सुमित वोहरा ने बताया कि इस संबंध में शिक्षा निदेशालय से शिकायत भी की थी। निदेशालय ने आदेश तो जारी किया है लेकिन अभिभावक पूरी तरह से संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने कहा कि पूरी गाइड लाइंस ठीक से बनी है लेकिन इंटर स्टेट के तहत एनसीआर क्षेत्र को शामिल करने से परेशानी हो रही थी। हालांकि कुछ हद तक स्कूलों में होने वाली फर्जी मामलों पर लगाम लगने की उम्मीद है।