फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पढ़िए, कब और कैसे हो सकते हैं एससीए चुनाव?

विज्ञापन
विज्ञापन
प्रदेश विश्वविद्यालय को इस बार एससीए चुनाव अलग-अलग करवाने पड़ सकते हैं। यूजी कक्षाओं का परिणाम लटका होने से कॉलेजों में तो छात्र संघ चुनाव करवाना मुश्किल होगा, मगर एचपीयू में पीजी कक्षाओं का परिणाम लटके होने जैसी कोई समस्या नहीं है। विवि प्रशासन कॉलेजों से पहले एचपीयू में एससीए चुनाव करवाने के विकल्प पर फैसला ले सकता है।
विज्ञापन


इससे पूर्व वर्ष 2000 में भी ऐसा फैसला लेकर सितंबर माह में एससीए चुनाव करवाए गए थे। इस बार भी एससीए चुनाव को लेकर बढ़ रहा छात्र संगठनों का दबाव और आक्रोश कम करने के लिए प्रशासन को वर्ष 2000 की तर्ज पर विवि और कॉलेजों में अलग-अलग चुनाव करवाने का फैसला लेना पड़ सकता है।

परिणाम भी डाल रहा है अड़ंगा

बीस अगस्त को कॉलेजों से रूसा के परिणाम को मांगी गई इंटरनल असेसमेंट और अवार्ड के ब्योरे की तिथि समाप्त हो गई है। इसके बाद प्रथम सत्र का परिणाम तैयार करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसमें कितने दिन लगेंगे और इस माह अंत तक रिजल्ट बनेगा भी या नहीं, इस पर कुछ नहीं कहा जा सकता।

यूजी कक्षाओं के पुराने ईयर सिस्टम के तहत बीए द्वितीय और बीसीए जैसी कक्षाओं के परिणाम घोषित नहीं हुए हैं। रूसा प्रथम और द्वितीय सत्र का परिणाम भी नहीं निकला है। सुप्रीमकोर्ट के आदेशों पर बनी लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों के मुताबिक चुनाव में हर उम्मीदवार का पिछली कक्षा का परिणाम निकलने तक वह योग्य नहीं हो सकता है। एससीए चुनाव पर विवि प्रशासन की चुप्पी की वजह भी यही मानी जा रही है।
विज्ञापन

2000 में सितंबर में हुए थे चुनाव

विवि प्रशासन बिना परिणाम के चुनाव की तिथि तय नहीं कर पा रहा है। तिथि घोषित करने को लेकर एसएफआई और एबीवीपी प्रदेशव्यापी आंदोलन भी शुरू कर चुकी हैं। ऐसे में विवि प्रशासन को कम से कम विवि में एससीए चुनाव करवाने पर फैसला लेना पड़ सकता है।

वर्ष 1994 से एससीए चुनाव पर लगे प्रतिबंध के बाद वर्ष 2000 में चुनाव की बहाली पर प्रदेश विश्वविद्यालय में 17 सिंतबर को चुनाव हुए थे। कॉलेजों में 21 सितंबर को चुनाव करवाए गए थे। चुनाव बहाली को लेकर छात्र संगठनों के लंबे संघर्ष के बाद अलग-अलग चुनाव करवाने का फैसला लिया गया था।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें