पंजाब यूनिवर्सिटी चुनावी दंगल में तब्दील हो गई है। गुरु और शिष्य दोनों ही इस दंगल में कूद चुके हैं। कैंपस में पूरे अगस्त यही माहौल रहेगा। पंजाब यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन (पुटा) और स्टूडेंट काउंसिल के चुनाव की तिथि बदलने से गेम भी बदल सकता है। पुटा चुनाव की तिथि 13 अगस्त से बदलकर 20 अगस्त कर दी गई है।
समय बढ़ने का फायदा देविंद्र गुट को मिल सकता है। देविंद्र गुट ही तिथि बढ़वाने की मांग कर रहा था, ताकि चुनाव प्रचार के लिए भरपूर समय मिल सके। हालांकि खालिद-अक्षय गुट काफी पुराना है। उसी का वर्चस्व इस बार भी नजर आ रहा है। लेकिन तिथि बढ़ने से देविंद्र गुट को कम बैक करने का मौका मिल गया है।
कैंपस ही नहीं घरों की भी लग रही दौड़
चुनाव में जीत दर्ज करने केलिए दोनों गुट पीयू कैंपस ही नहीं, शिक्षकों केघरों तक दौड़ लगा रहे हैं। घरों में ही मीटिंग हो रही हैं। शिक्षकों से उनकी समस्याएं जानकर उन्हें हल करवाने का भरोसा दिया जा रहा है। प्रो. देविंद्र ने बताया कि छुट्टियों में कैंपस प्रचार नहीं हो पाता। इसलिए शिक्षकों से घर जाकर उनकी समस्याएं जानी जा रही हैं।
छोटे छात्र संगठन भी सक्रिय
पीयू ने छात्र संगठनों की मांग केबाद छात्र संघ चुनाव 28 अगस्त की बजाए 25, 26, 27 या फिर 3 सिंतबर को करवाने के लिए लिखा है। चुनाव की तिथि बदलने से छोटे छात्र संगठन भी सक्रिय हो गए हैं। उनकी सक्रियता चुनाव की गेम बदल सकती है। अभी तक सिर्फ दो या तीन संगठन ही सक्रिय दिख रहे हैं। लेकिन तिथि बदलने से अन्य संगठन भी गोटियां भिड़ाने में जुटे हैं।
यदि चुनाव 25 या 26 अगस्त को होते हैं तो स्टूडेंट ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इंडिया (सोई), हिंदुस्तान स्टूडेंट्स एसोसिएशन (एचएसए) और पंजाब यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन (पुसू) को फायदा हो सकता है। सोई पहले से सक्रिय दिख रही है। जबकि एनएसयूआई, एबीवीपी, इनसो और सोपू अभी एक्टिव नहीं दिख रही। सिर्फ पैनल घोषणा के दिन ही एनएसयूआई छात्र नेता कैंपस में दिखे।