पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) से पीएचडी कर रहे स्टूडेंट को अब थीसिस जमा होने के बाद वाइवा के लिए साल भर तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा। पीयू प्रशासन पीएचडी डिग्री जल्द से जल्द अवार्ड करने के लिए नए नियमों को लागू करने जा रहा है। पीएचडी डिग्री मिलने में सबसे अधिक देरी संबंधित विभाग द्वारा पैनल का नाम नहीं भेजने से होती है।
अधिकारियों के अनुसार पीएचडी थीसिस के मूल्यांकन के लिए पीएचडी गाइड और चेयरमैन को 8 से 10 दूसरी यूनिवर्सिटी में पढ़ाने वाले प्रोफेसर के नाम देने होते हैं।
नए नियमों के तहत तीन महीने के भीतर थीसिस की रिपोर्ट नहीं देने वाले दूसरी यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर को पीयू ब्लैक लिस्ट कर देगी। ऐसे प्रोफेसर के पास भविष्य में कभी थीसिस नहीं भेजी जाएगी।
पहले पैनल भेजो, फिर जमा होगी पीएचडी की थीसिस
पीएचडी मामले को लेकर कुछ रोज पहले ही अधिकारियों की अहम बैठक हुई है। बैठक में फैसला लिया गया कि किसी भी स्टूडेंट की थीसिस तभी जमा होगी जब संबंधित विभाग की ओर से मूल्यांकन के लिए प्रोफेसर का पैनल थीसिस ब्रांच के पास पहुंच जाएगा। इस संबंध में सभी विभागों को चिट्ठी भी जारी करनी शुरू कर दी गई है। गौरतलब है कि पीयू में हर साल 300 से 320 शोधकर्ता पीएचडी करते हैं।
यूबीएस की छात्रा की पीएचडी थीसिस एक साल से लटकी
सुनने में यह थोड़ा अजीब लेगे, लेकिन पीयू के यूबीएस से पीएचडी कर रही एक छात्रा एक साल से वाइवा के लिए पीयू अधिकारियों के पास चक्कर लगा रही है।
जानकारी अनुसार यूबीएस की एक छात्रा ने सितंबर 2014 में थीसिस जमा कराई। लेकिन एक एग्जामिनर से करीब एक साल बाद रिपोर्ट पहुंची है। पीयू थीसिस ब्रांच द्वारा बार-बार रिमाइंडर भेजने के बाद भी प्रोफेसर ने रिपोर्ट नहीं भेजी।
कोट्स ..
पीएचडी थीसिस का जल्द मूल्यांकन और वाइवा करने के लिए नियमों में कुछ संशोधन किया गया है। थीसिस जमा करने से पहले विभाग को प्रोफेसरों का पैनल देना होगा। 3 महीने के भीतर थीसिस रिपोर्ट देना अनिवार्य कर दिया है, सभी स्टूडेंट का वाइवा 6 महीने के भीतर हो जाएगा।
प्रो.परविंदर सिंह, कंट्रोलर ऑफ एग्जामिनेशन पीयू