पंजाब यूनिवर्सिटी कैंपस में शुक्रवार को छात्र संगठनों ने गुपचुप तरीके से विभागों में फीस बढ़ाए जाने पर जमकर हंगामा किया।
करीब चार घंटे तक इस फैसले के विरोध में स्टूडेंट फॉर सोसायटी (एसएफएस) और पुसू समर्थकों ने खूब नारेबाजी की।
100 से अधिक विद्यार्थियों ने वीसी दफ्तर के गेट को घेर लिया और बढ़ी फीस की फैसला वापस लेने पर अड़े रहे। विरोध को देखते हुए डीयूआई, डीएसडब्ल्यू और कई हॉस्टल वार्डन घटनास्थल पर पहुंचे।
डीन यूनिवर्सिटी इंस्ट्रेक्शन (डीयूआई) प्रो. मधु राका के आश्वासन के बाद मामला शांत हुआ।
एसएफएस नेता अवतार ने आरोप लगाया कि पीयू ने फीस में 10 से 20 फीसदी तक इजाफा कर दिया है। इस बारे में पीयू ने विद्यार्थियों को जानकारी नहीं दी।
एमसीए छात्र सिकंदर ने बताया कि उनकी फीस 34 हजार से बढ़ाकर 54 हजार कर दी है। एमए पॉलिटिकल साइंस विभाग में फीस 1400 से बढ़ाकर 3400 कर दी है।
इकोनॉमिक्स विभाग के रमन ने कहा कि पीयू ने बिना किसी नोटिस के एकदम विद्यार्थियों से मनमर्जी से फीस वसूलनी शुरू कर दी है। छात्र बबलप्रीत ने आरोप लगाया कि यूआईटी की फीस 14000, केमिकल इंजीनियरिंग में एमबीए की फीस 24000 होटल मैनेजमेंट की फीस आठ हजार रुपये बढ़ा दी है।
पीयू सिंडीकेट ने जून से फीस में बढ़ोतरी का फैसला लिया था। आर्थिक तंगी को देखते हुए पीयू ने कई साल बाद फीस बढ़ाई है।
आठ सदस्यों की कमेटी गठित, 18 को मीटिंग
फीस बढ़ोतरी के विरोध के बाद डीयूआई प्रो. मधु राका ने आठ सदस्यों की कमेटी पूरे मामले को रिव्यू करने के लिए गठित की है।
इसमें डीयूआई के अलावा रजिस्ट्रार, डीसीडीसी, डीएसडब्ल्यू, प्रो. केशव मल्होत्रा, प्रो. शैली वालिया, डीएसडब्ल्यू (वुमन) और एफडीओ शामिल हैं।
18 नवंबर को इस मामले में बैठक होगी। एसएफएस छात्र नेता रमन ने बताया कि विरोध प्रदर्शन के बाद डीयूआई ने 30 नवंबर तक लेट फीस न लेने का आश्वासन दिया है।
उन्होंने कहा कि अगर कोई कार्रवाई नहीं हुई तो वे भूख हड़ताल शुरू कर देंगे।