उम्मीद के मुताबिक पंजाब यूनिवर्सिटी छात्र संगठनों को पीयू प्रशासन ने फिर से नारेबाजी करने और समर्थकों को जोड़ने का मुद्दा दे दिया है। 7 फरवरी को पीयू कुलपति की ओर से फीस बढ़ोतरी को लेकर गठित कमेटी की सिफारिशों पर विरोध शुरू हो गया है।
पीयू कैंपस में स्टूडेंट फॉर सोसाइटी छात्र नेताओं और समर्थकों ने पीयू द्वारा विभिन्न कोर्स में 10 से 20 फीसदी फीस बढ़ाने का कड़ा विरोध किया है।
इतना ही नहीं छात्र नेताओं ने पीयू प्रशासन को हफ्ते भर के भीतर अपना फैसला वापिस लेने का समय दिया है। दोपहर करीब 12.30 बजे स्टूडेंट फॉर सोसाइटी प्रधान अर्शदीप सिंह की अगुवाई में 25 से 30 समर्थक वीसी प्रो.अरुण कुमार ग्रोवर के सामने विरोध जताने के लिए वीसी दफ्तर के सामने एकजुट हो गए। कुछ देर नारेबाजी कर एसओएस छात्र नेताओं ने वीसी दफ्तर में फीस बढ़ोतरी के विरोध में अपना ज्ञापन सौंप दिया है।
अर्शदीप ने कहा कि पीयू के इस फैसले से करीब 15 हजार विद्यार्थियों पर सीधे फीस बढ़ोतरी की मार पड़ेगी। उन्होंने कहा कि पीयू को अन्य खर्चों पर लगाम लगानी चाहिए। उनका कहना है कि गरीब विद्यार्थियों के लिए पीयू से डिग्री पाना अब आसान नहीं होगा।
फीस पर दो फाड़ छात्र संगठन
पीयू प्रशासन ने अगले सत्र से विभिन्न कोर्स की फीस 10 से 20 फीसदी बढ़ाने का फैसला लिया है। लेकिन प्रशासन ने पहले से ही छात्र संगठनों के विरोध की संभावना को देखते हुए, फीस कमेटी में पहली बार पीयू स्टूडेंट काउंसिल सदस्यों को भी शामिल किया था।
इनसो नेता और काउंसिल जनरल सेक्रेटरी डा.आभा शर्मा ने भी फीस बढ़ोतरी को एकदम सही माना है, लेकिन अन्य छात्र संगठन फीस बढ़ाने को लेकर अलग-अलग राय रखते हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में छात्र संगठन फीस बढ़ोतरी को लेकर दो फाड़ हो सकते हैं।
छात्र नेताओं को मिला नया मुद्दा पीयू प्रशासन की ओर जुलाई 2014 नए सत्र में फीस बढ़ोतरी का फैसला छात्र संगठन चुनाव में बड़ा मुद्दा बन सकता है। ऐसे में सभी छात्र संगठन अब प्रथम वर्ष में आने वाले विद्यार्थियों के वोट बैंक को ध्यान में रखकर विरोध प्रदर्शन करेंगे। स्टूडेंट फॉर सोसाइटी के बाद अन्य छात्र संगठनों ने भी बड़े स्तर पर इस मुद्दे को उठाने की तैयारी कर ली है।
फीस में काफी सोच समझकर मामूली बढ़ोतरी की गई है, ताकि विद्यार्थियों पर अनावश्यक बोझ नहीं पड़े। रीजन की अन्य यूनिवर्सिटी के मुकाबले पीयू में पढ़ाई क्राफी सस्ती है। खर्चों को पूरा करने के लिए फीस में कुछ बढ़ोतरी जरूरी थी। बोर्ड ऑफ फाइनेंस में पंजाब और यूटी के अधिकारियों ने पिछले साल भी फीस में बढ़ोतरी की बात कही थी।
जीके चतरथ (फीस कमेटी के सदस्य और पीयू के सीनियर सीनेटर )