राजधानी के स्कूल नर्सरी की सीटें बढ़ाने को तैयार नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट ने पूछा था कि क्या ट्रांसफर केस के मामले में पांच-पांच सीटें बढ़ाई जा सकती हैं।
कोर्ट ने दिल्ली सरकार से दो अप्रैल तक अपना पक्ष रखने के लिए कहा है। इस मामले में मुख्य सचिव एसके श्रीवास्तव ने बुधवार को निजी स्कूलों के संगठन प्रतिनिधियों व प्रिंसिपल की राय जानने के लिए बैठक बुलाई।
इसमें स्कूल प्रबंधन संगठनों की तरफ से शिक्षा के अधिकार अधिनियम का उल्लंघन का हवाला देकर, जबकि सीबीएसई ने प्रत्येक छात्र के लिए निर्धारित जगह के कानून के उल्लंघन और शिक्षा निदेशक ने 25 फीसदी सीटें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को दिए जाने के सरकुलर का हवाला देकर सीट बढ़ाने में असमर्थता जताई।
दिल्ली स्टेट पब्लिक स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन के चेयरमैन आरसी जैन का कहना है कि आरटीई एक्ट कहता है कि प्रत्येक क्लास में 40 सीटें होंगी। बढ़ाते हैं तो उल्लंघन है। एक कक्षा में 5 सीट बढ़ाने का मतलब है कि पूरे स्कूल में 70 सीटें बढ़ानी होंगी। इस पर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग समेत बाकी लोग भी सीटें मांगेंगे।
बैठक में आरसी जैन के अलावा फेडरेशन ऑफ पब्लिक स्कूल के आरपी मलिक और अन्य संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। मुख्य सचिव ने स्कूल प्रबंधन प्रतिनिधियों को बताया कि वो 2 मई को कोर्ट में जवाब दाखिल कर देंगे।