प्रदेश के सरकारी पॉलीटेक्निक को कार्यवाहक प्रधानाचार्यों से मुक्ति मिलने वाली है। राज्य सरकार सात साल बाद सरकारी पॉलीटेक्निक के प्रधानाचार्य पद के लिए विभागीय पदोन्नति कमेटी (डीपीसी) की बैठक होने वाली है।
प्राविधिक शिक्षा विभाग ने इसके लिए लोक सेवा आयोग से अनुरोध किया है, ताकि जल्द से यह प्रक्रिया पूरी कर ली जाए।
सूबे में वर्ष 2004 तक तो नियमानुसार प्रधानाचार्य के पदों पर डीपीसी होती रही, लेकिन इसके बाद गड़बड़ियां शुरू हो गईं। काफी दबाव के बाद 2006 में डीपीसी हुई पर इसके बाद से नहीं की गई।
मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा। प्रधानाचार्य बनने की कतार में लगे लोगों और सरकार के बीच यह मामला लंबा खिंचा।
अखिलेश सरकार पात्रों को उनका हक देना चाहती है। इसलिए प्राविधिक शिक्षा विभाग हाईकोर्ट से यह मामला वापस लेकर डीपीसी करना चाहती है।
प्राविधिक शिक्षा विभाग ने लोक सेवा आयोग को पत्र भी भेज दिया है कि वहां से जल्द से जल्द अधिकारी को नामित किया जाए ताकि डीपीसी की प्रक्रिया पूरी की जाए।
प्रदेश में मौजूदा समय 97 सरकारी पॉलीटेक्निक में लगभग 85 में कार्यवाहक प्रधानाचार्य हैं। विभागीय जानकारों की मानें तो कुछ कार्यवाहक प्रधानाचार्य नहीं चाहते कि डीपीसी हो। इसके लिए वे कोर्ट जाने की तैयारी भी कर रहे हैं।