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नर्सरी दाखिला: क्या फिर कोर्ट जाएगा मामला?

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सुप्रीम कोर्ट से स्कूलों में नर्सरी के दाखिले पर लगी रोक हटने के बाद जहां कुछ पैरेंट्स को राहत मिली है, वहीं इस आदेश के जरिए राहत की उम्मीद करके चल रहे काफी अभिभावकों को झटका लगा है।
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दाखिले 18 दिसंबर के नोटिफिकेशन के आधार पर होंगे। इसके साथ ही इंटर स्टेट ट्रांसफर वाले अभिभावकों के बच्चों को भी एडमिशन मिलेंगे।

हालांकि इस मामले में उन्हीं अभिभावकों के बच्चों को दाखिला मिलेगा, जिन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाया था।

क्या होगा इंटर स्टेट का फॉर्मूला?

एडमिशन नर्सरी डॉट कॉम प्रमुख सुमित वोहरा ने कहा कि अब 70 अंक वालों का भविष्य फिर से अधर में है। पहले भी 70 अंकों वालों को दाखिला नहीं होने की परेशानी हो रही थी।

कई स्कूलों में ड्रॉ के बाद दाखिले हो गए थे और फीस भी जमा हो गई थी। लिहाजा उनके तो दाखिले पक्के हो सकते हैं। वहीं, अभी तक यह समझ नहीं आ रहा है कि इंटर स्टेट ट्रांसफर के लिए क्या फॉर्मूला रहेगा। स्कूलों में कितनी सीटें बची हैं, इसका भी पता नहीं है। अब अभिभावकों की निगाहें निदेशालय के आदेश पर टिकी हुई हैं।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद से निदेशालय में बैठकों का दौर शुरू हो गया जो देर शाम तक जारी रहा। संभव है कि निदेशालय बृहस्पतिवार को कोई आदेश जारी करे। मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट ने 11 अप्रैल को दिल्ली हाई कोर्ट के तीन अप्रैल के निर्देश पर स्टे लगाते हुए नर्सरी दाखिले पर रोक लगा दी थी।

क्या कहते हैं निजी स्कूल?

दिल्ली स्टेट पब्लिक स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष आर.सी जैन ने कोर्ट के फैसले को देर से आया दुरुस्त फैसला बताया। रोक हटने से स्कूल बृहस्पतिवार से प्रवेश प्रक्रिया शुरू कर सकेंगे। स्कूलों के साथ-साथ इस फैसले से पैरेंट्स की दुविधा भी समाप्त हो जाएगी।

पूसा रोड स्थित बाल भारती पब्लिक स्कूल केप्रिंसिपल एल.वी सहगल ने सुप्रीम कोर्ट केफैसले पर कहा कि अब शिक्षा निदेशालय के आदेश का इंतजार किया जाएगा। निदेशालय का आदेश आते ही दाखिला प्रक्रिया को शुरू कर दी जाएगी।

नेशनल प्रोग्रेसिव स्कूल कॉन्फ्रेंस की अध्यक्ष अमिता मूला वटट्ल ने कहा कि अभी कुछ स्थिति स्पष्ट नहीं है। जब तक निदेशालय की ओर से कोई गाइडलाइंस या आदेश नहीं आता तब तक कुछ नहीं कहा जा सकता है।
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कोर्ट जाने की तैयारी में अभिभावक

राष्ट्रीय अभिभावक महासंघ के अध्यक्ष अशोक अग्रवाल ने कहा कि दिसंबर में शिक्षा निदेशालय के पहली गाइडलाइंस आने के बाद जो स्थिति बनी थी वैसी ही बन गई है।

इतने चरणों और नोटिफिकेशन के बाद जो स्थिति बन रही है उसे देखकर लग रहा है कि अभिभावकों को फिर से परेशानी उठानी होगी। अब शिक्षा निदेशालय दाखिले केलिए कोई फॉर्मूला देता है तो उसे देखने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

पैरेंट्स एक बार फिर से कोर्ट जाने की बात कह रहे हैं। केवल जो अभिभावक कोर्ट गए उनको राहत मिलने से बाकी अभिभावकों में निराशा है। लिहाजा वह कोर्ट जाने की बात कह रहे हैं। जबकि काफी पैरेंट्स चाहते हैं कि अब बस इन सब का अंत होना चाहिए और दाखिले शुरू होने चाहिए।
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