किसी की गर्दन शर्म से झुकी हुई थी, तो कोई बार-बार कह रहा था कि पापा
प्लीज इस बार माफ कर दो आगे से क्लास में रेग्युलर रहूंगा।
नेशनल पीजी
कॉलेज में फर्स्ट यूनिट टेस्ट में कम नंबर पाने वाले छात्रों और उनके
अभिभावकों के साथ प्राचार्य डॉ. एसपी सिंह ने बैठक की। डिग्री स्तर पर इस
कॉलेज ने इस अनूठी पहल की शुरुआत की है।
इसके तहत जिस छात्र के 50 परसेंट
से कम नंबर होंगे उनके अभिभावकों को बुलाकर बच्चों की हकीकत बताई जाएगी।
सोमवार को आर्ट्स फैकल्टी के ग्रेजुएशन फर्स्ट सेमेस्टर के छात्रों को
अभिभावकों के सामने बताया गया कि उन्होंने क्या-क्या गलतियां की हैं।
कॉलेज ने 16 जुलाई से शुरू हुए शैक्षिक सत्र में अब तक 52 दिन की पढ़ाई
में कौन कितने दिन क्लास आया, इसका भी पूरा ब्योरा पेश किया। जिन छात्रों
के 50 परसेंट से कम नंबर थे उनमें से अधिकतर 20 या 22 दिन ही कॉलेज आए थे।
जब उनकी अटेंडेंस के बारे में परिवारीजनों को बताया कि गया तो छात्रों की
गर्दन नीचे झुक गई। वे बार-बार अपने किए पर माफी मांग रहे थे। कुछ छात्रों
की कापियों में पूरे सवाल हल नहीं थे।
उन्होंने बताया कि स्पीड धीमी होने
की वजह से पूरे प्रश्न नहीं हल कर पाए। वहीं कुछ छात्रों ने बताया कि
उन्हें इस टेस्ट की गंभीरता के बारे में मालूम नहीं था। प्राचार्य डॉ. एसपी
सिंह ने कहा कि एक सेमेस्टर में पांच टेस्ट होते हैं।
पहला टेस्ट 10 नंबर
का था। आगे अभी 90 नंबर के चार टेस्ट होंगे। इसमें क्लास में आपकी उपस्थिति
कितनी है उसके नंबर भी जुड़ते हैं। कुछ अभिभावकों ने न्यूमेरिकल
एप्टीट्यूट में बच्चों के नंबर कम आने पर उनकी एक्स्ट्रा क्लास लगाने का
अनुरोध किया।
इस पर तत्काल एक्सट्रा का शेड्यूल तत्काल जारी कर दिया गया।
प्राचार्य ने बताया कि साइंस व कॉमर्स फैकल्टी में 50 प्रतिशत से कम नंबर
पाने वाले छात्रों के अभिभावकों की मीटिंग 26 व 28 सितंबर को बुलाई गई है।
प्राचार्य
डॉ. एसपी सिंह का कहना है कि उनके कॉलेज में स्टूडेंट को एग्जाम की
कापियां घर ले जाने को दी जाती हैं और टॉपर्स की कापियां लाइब्रेरी
में रखी जाती हैं।
अब कम नंबर पाने वाले स्टूडेंट के घरवालों को
बुलाकर छात्रों की हकीकत बताने का नया प्रयोग शुरू किया गया है।